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आजकल प्रेम विवाह का ट्रेंड सा चल पड़ा है। हालांकि इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन प्रेम विवाह के फेर में पड़ने से पहले इससे जुड़ी कुछ बातों पर आपको विशेष ग़ौर करने की आवश्यकता है। वैसे भी युवा अवस्था हमारे जीवन का बेहद सुन्दर काल होता है। इस अवस्था में हमारे शरीर और भुजाओं में बल, मन में कुछ बड़ा कर जाने की चाह, आँखों में भविष्य के सुन्दर और कोमल सपने और इसी अवस्था में मनुष्य के भीतर पनपता है प्रेम। युवा अवस्था में किसी विशेष और अपने अनुकूल को देखकर उस पर मन मोहित हो जाता है और फिर मनुष्य अपना सबकुछ उस पर न्यौछावर कर देना चाहता है और फिर यही प्रेम अपनी अंतिम परिणति विवाह पर पाता है, जिसे हम प्रेम विवाह कहते हैं।
लेकिन जीवन की एक सच्चाई यह भी है कि प्रेम विवाह का ही वह मौक़ा है, जब विवाह के बाद माता-पिता और संतान के बीच विचारों का विरोध प्रारम्भ हो जाता है। माता पिता को लगने लगता है कि कहीं बेटा अपने मन से अपना जीवन साथी चुनकर अपने लिए ग़लत निर्णय कर रहा है, अंजाने में भूल कर रहा है और बेटे को लगता है कि उसने जिस साथी को अपने लिए चुना है वही उसके जीवन का सबसे सही इंसान है। अब सवाल ये है कि आख़िर इस विरोध को कैसे पाटा जाये। तो इसके लिए आपको विवाह करने से पूर्व कुछ बातों का ध्यान रखना होगा।
जी हाँ, विवाह करने से पूर्व यह जान लेना अति आवश्यक है कि विवाह केवल अपने प्रेम को पाने का मार्ग नहीं है, अपितु विवाह से जीवन का एक नया द्वार भी ख़ुलता है। चूँकि हर नये जीवन के साथ नये उत्तरदायित्व भी होते हैं। ऐसे में यदि इन उत्तरदायित्वों को समझकर विवाह का निर्णय किया जाये, तो यक़ीन मानिए आपका दाम्पत्य जीवन आनन्द से भरा रहेगा। इससे आपको कभी भी इस बात का पछतावा भी नहीं होगा कि आपने कोई अनुचित काम नहीं किया है।
Author: Amit Rajpoot
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