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जीवन शरीर के साथ ऐसे ही नहीं जुड़ता है, यह एक प्रक्रिया की तरह होता है। जब भी कोई औरत या माँ अपना गर्भ धारण करती है, तो दो छोटे-छोटे सेल्स या कोशिकाएँ एक-दूसरे से आपस में जुड़ती हैं, जिससे एक छोटा सा माँस का गोला बनता है। इस माँस के गोले को जीवन बनने के लिए या गर्भ धारण करने के लिए इसमें 40 से 48 दिनों के भीतर इसमें जीवन की प्रक्रिया का प्रवेश होता है। जी हाँ, इस मसले पर डॉक्टर्स की अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन ये सच है कि 40 से 48 दिनों के भीतर ही गर्भ में जीवन बनने की प्रक्रिया का आरम्भ होता है।
आपको बता दें कि कुछ ऐसे भी जीवन होते हैं, जो बाद में प्रवेश करते हैं और इसका ज्ञान आपको थोड़ा हैरान भी कर सकता है। लेकिन ये पूरी तरह से सच है। जी हाँ, वास्तव में हर जच्चा, माँ या औरत इस बात को स्पष्ट तौर पर महसूस कर सकती है, अगर उसे इस बात की थोड़ी सी ट्रेनिंग भर मिल जाये। दिलचस्प है कि अगर कोई माँ देखती है कि वो अपने गर्भ में 40 से 48 दिनों बाद प्राण पाये हैं तो यक़ीनन जान लीजिए कि वह किसी ख़ास प्राणी को जन्म देने वाली है, क्योंकि इस जीवन को अंदर व्यवस्थित होने में समय लगता है।
आपने सुना होगा कि किसी ने गोतम की माँ को देखा और कहा कि आप एक ज़बरदस्त प्राणी को जन्म देने जा रही हैं। इसका कारण यह है कि जब आप देखते हैं कि गर्भ धारण के 48 दिनों तक भी उसमें जीवन नहीं आया है तो इसका मतलब है कि आप एक असाधारण जीव को जन्म देने जा रहे हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गर्भ में रह रहे शरीर के साथ जीवन यानी कि आत्मा अपना सामन्जस्य बैठाने की कोशिश करती है और जब यह उसकी वासना के साथ पक्की हो जाती है, तभी जीवन बनता है।
आपको बता दें कि गर्भ से आत्मा या जीवन के पक्का होने का समय गर्भ के भीतर 84 से 90 दिनों का होता है। यदि इस बीच शरीर से जीवन आपना संबंध नहीं बना सका तो वह उसे छोड़कर भी जा सकता है।
Author: Amit Rajpoot
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