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जी हा, लंबे इंतजार और कई सारे विवादों के बाद अब ऋतिक रोशन की मोस्ट अवेटिड फिल्म 'सुपर 30' अगले महिने सिनेमा घरों में रिलीज होने को तैयार है, जो कि बिहार के मशहूर मैथेमेटिशियन आनंद कुमार के जीवन पर आधारित है। वैसे देखा जाए तो इसे आनंद कुमार की बायोपिक कहने के बजाए सिर्फ ऋतिक रोशन की फिल्म कहना कहीं अधिक सही लगता है, हालांकि वैसे तो ये आनंद कुमार की ऑफिशयल बायोपिक फिल्म हैं, जिसका ट्रेलर देख खुद आनंद कुमार खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं, पर अगर आप एक जागरूक दर्शक की नजर से इसके ट्रेलर देखते हैं तो इसमें कुछ बातें आपके बेहद खटकती हैं। जैसे कि...
बिहारी शख्स के किरदार के लिए ऋतिक रोशन को सांवला क्यों बना दिया
हो सकता है आपको हमारा ये सवाल काफी रेसिस्ट लगे, पर आप सुपर 30 के ट्रेलर में आनंद कुमार के रूप में ऋतिक को देखेंगे तो पाएंगे फिल्म में उन्हें एक बिहारी शख्स के रूप में दर्शाने के लिए उनका रंग काफी सांवला कर दिया गया है। जबकि असल जिंदगी में खुद आनंद कुमार भी इतने सांवले नहीं दिखते हैं। ऐसे में फिल्म सुपर 30 में ऋतिक के चेहरे पर ऊपर से थोपी गई कालिख काफी अखरती है।
बिहारी एक्सेंट बोलते बेहद अटपटे लगते हैं ऋतिक रोशन
फिल्म सुपर 30 में ऋतिक रोशन के मुंह से आनंद कुमार की क्षेत्रीय बोली ‘मगही’ सुनना भी अपने आप में अजीब लगता है। अब कुछ लोग इसके लिए ऋतिक की तारीफ सिर्फ इस वजह से कर रहे हैं कि उन्होने ये खास बोली और लहजा साधने के लिए काफी मेहनत की है, लेकिन वहीं गौर किया जाए तो ऋतिक इस खास भाषा के लहजे को कहीं से साध नहीं पाए... उनका बिहारी एक्सेंट पूरी तरह से फेक लगता है, ठीक उसी तरह से जैसे कोई नौसीखिया जब अंग्रेजी बोलता है।
चेहरे पर इतनी लाचरगी भी अखरती है
फिल्म सुपर 30 में ऋतिक एक ऐसे शख्स की भूमिका में हैं जो कि प्रतिभावान होने के बावजूद पैसों और साधनो के अभाव में अपने जायज मुकाम को पा ना सका और फिर उसने अपने जैसे ही आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के सपनो में रंग भरने का कवायद शुरू की। ऐसे में देखा जाए तो आनंद कुमार का व्यक्तित्व असल में काफी मजबूत इरादों वाला है, पर जब ट्रेलर में आनंद के रूप में ऋतिक को देखते हैं तो उनके चेहर पर लाचरगी का भाव नजर आता है। अगर इसकी समानता बिहारी इसांन की सरलता और भोलेपने से भी की जाए तो ऋतिक के चेहरे पर दिखती लाचरगी कहीं से भी जायज नहीं लगती है।
ऐसे में देखा जाए तो ये सुपर 30 ऋतिक रोशन की दमदार कहानी और इमोशन से भरपूर एक मसाला फिल्म मात्र है, जिसमें मुख्य पात्र को लोगों की नजरो में हीरो बनने के सारे इनग्रेडिएंट्स मौजूद है।
Author: Yashodhara Virodai
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