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भौतिक जीवन की अभिव्यक्ति ऐसी है कि उसकी ऊर्जा यानी कि प्राण की पाँच बुनियादी अभिव्यक्तियाँ होती हैं। इन्हें समान, प्राण, उडान, अपान और व्यान कहते हैं। जब मनुष्य का शरीर अपने प्राण को त्यागता है तो असल में एक प्राण नहीं इन पाँचों प्राणों की इन पाँचों अभिव्यक्तियों को क्रमशः त्यागता है। इसमें सबसे पहले वह समान का त्याग करता है, जो कि हमारे शरीर का ताप नियंत्रित करके रखता है। इसीलिए जब प्राण छूटते हैं तो उसकी पहली निशानी होती है कि शरीर ठंडा होने लगता है। समान के निकल जाने के 48-64 मिनट के बीच दूसरी अभिव्यक्ति प्राण के निकल जाने का वक़्त आता है और वह निकल जाता है।
आपको बता दें कि इसके बाद 6-12 घण्टे के बीच तीसरी अभिव्यक्ति उडान निकलता है। मालूम हो कि उडान के निकलने से पूर्व कुछ ऐसी तांत्रिक शक्तियाँ होती हैं, जिनके दम पर प्राण को रोका जा सकता है, लेकिन यदि शरीर से उडान प्राण निकल गया तो फिर इंसान को वापस जीवित नहीं किया जा सकता है। अगली चीज़ है अपान जो 8-18 घण्टे के बीच निकल जाता है। इसके बाद अंत में नम्बर आता है प्राण की अंतिम अभिव्यक्ति व्यान का, जो कि प्राण की संरक्षक प्रकृति है। व्यान 11-14 दिन तक निकलता रह सकता है।
अब समझने वाली बात यह है कि व्यान के निकलने की यह अवधि उस मनुष्य के लिए है, जिसकी स्वाभाविक मृत्यु हुयी है। लेकिन यदि किसी की अकालमृत्यु हुयी है तो फिर ऐसे मनुष्य के प्राण में 48-90 दिनों तक स्पनंदन रह सकता है।
ऐसे लोगों के लिए आप कुछ उपाय कर सकते हो। इन उपायों में से एक श्राद्ध भी होता है। इसलिए प्राणों का शरीर के साथ भ्रम समाप्त करने के लिए श्राद्ध करना ज़रूर है। विवेकहीन मन में भी कोई सच स्थापित करने के लिए हमें रस्मों का सहारा लेना पड़ता है, इसलिए भी मृत्यु के बाद श्राद्ध ज़रूरी होता है।
Author: Amit Rajpoot
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