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तेलुगू फिल्म अर्जुन रेड्डी की हिंदी रिमेक ‘कबीर सिंह’ आज आखिरकार पर्दे पर रिलीज हो चुकी है। अर्जुन रेड्डी के डायरेक्टर संदीप वांगा ने ही ‘कबीर सिंह’ को बनाया है। फिल्म में शाहिद कपूर और कियारा आडवाणी मेन लीड रोल में हैं। फिल्म का ट्रेलर और म्यूजिक पहले ही हिट हो चुका है, अब देखने वाली बात यह है क्या फिल्म भी अपने गानों की तरह लोगों के दिलों पर राज कर पाएगी? अगर आप इस वीकेंड ‘कबीर सिंह’ देखने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो एक बार जरूर पढ़ लें हमारा ये शॉर्ट रिव्यू।
कहानी-
फिल्म की कहानी दिल्ली के एक मेडिकल स्टूडेंट कबीर राजधीर सिंह यानी कि शाहिद कपूर की कहानी है। जो अपने गुस्से मारा है। कॉलेज के स्टूडेंट्स हो या फिर टीचर्स... हर किसी के दिल में कबीर सिंह एक अलग-सा ही खौफ है। फिल्म की शुरुआत में दिखाया जाता है कि कैसे सर्जन कबीर सिंह अपने नशे की हालत से बर्बादी की ओर जा रहा है... और इसके बाद कहानी चली जाती है फ्लैशबैक मोड़ में। यहां दिखाया जाता है कि कबीर सिंह अपने कॉलेज का टॉपर होने के साथ-साथ फुलबॉल चैंपियन है, लेकिन उसे अपने गुस्से पर जरा-सा भी कंट्रोल नहीं है। वह गुस्से में किसी के भी हार-पैर तोड़ देता है। अपनी इस हरकतों की वजह से उसे कॉलेज से सस्पेंड कर दिया जाता है, वह कॉलेज छोड़ने वाला ही होता है कि फिर उसकी मुलाकात होती है प्रीति सिक्का यानी कियारा आडवाणी से... जोकि स्वभाव में मासूम, खूबसूरत और सिंपल लड़की है। कबीर पूरे कॉलेज में ऐलान कर देता है कि प्रीति उसकी है उसकी तरफ कोई आंख उठाकर नहीं देख सकता। इसके बाद पूरे फर्स्ट हाफ में आपको कबीर और प्रीति की लव स्टोरी देखने को मिलेगी। सेंकड हाफ में कबीर और प्रीति की लव स्टोरी में कुछ ऐसा होता है, जिसके बाद दोनों की राहे अलग हो जाती है। प्रीति की जुदाई का गम कबीर सह और यहां से वह शराब, सिगरेट और ड्रग्स में डूबकर अपनी सारी हदें पार कर देता है। क्या कबीर सिंह का क्लाइमैक्स अर्जुन रेड्डी जैसा है या फिर कबीर सिंह की कहानी कुछ अलग है... इस सवाल के जवाब के लिए आपको फिल्म सिनेमाघरों में जाकर देखनी पड़ेगी।
फिल्म की कहानी भले ही आपको सुनी-सुनी-सी लग रही हो, एक लड़का प्यार में पड़ता है, प्यार परवान चढ़ता है फिर मोहब्बत में दिल टूटता है और वो बन जाता है देवदास... भले ही फिल्म की कहानी में कुछ नयापन न हो... लेकिन डायरेक्टर संदीप वांगा ने इस कहानी को कहने का जो तरीका निकालकर लाया है व एकदम अनोखा है।
परफोर्मेंस-
पूरी फिल्म की बेस्ट बात है शाहिद कपूर का दमदार अभिनय... इस फिल्म से शाहिद कपूर ने साबित कर दिया है कि वह मुश्किल से मुश्किल किरदार को अपने अंदर बड़ी ही आसानी से साध सकते हैं। बात अगर कियारा आडवाणी की परफोर्मेंस की करें, तो उनका जितना किरदार है उतना ठीक है। हालांकि, कियारा आपको फर्स्ट हाफ में ही देखने को मिलेंगी, सेकंड हाफ में मानो वो कहीं गायब हो जाती हैं। क्लाइमैक्स के लास्ट एक दो सीन में उन्हें दोबारा लाया जाता है। हालांकि प्रीति के किरदार के साथ कियारा ने इंसाफ किया है। इन दोनों के अलावा फिल्म में कामिनी कौशल, सुरेश ओबेरॉय जैसे कलाकारों भी है, लेकिन शाहिद के किरदार के सामने हर कोई फिका है।
फिल्म की कमजोर कड़ी-
शानदार स्टोरी और शाहिद के दमदार परफोर्मेंस के बाद पूरी फिल्म में आपको जो चीज खलेगी, वो है फिल्म की लेंथ... जी हां, फिल्म तकरीबन 3 घंटे से भी ज्यादा की है... बीच-बीच में कई चीज़ों की रिपिटेशन आपको खलेगी। हालांकि, शाहिद के किरदार से आप इतने प्रभावित हो जाएंगे कि फिल्म की लेंथ को सहन कर जाएंगे।
देखे या नहीं-
कुल मिलाकर आप ‘कबीर सिंह’ पर पैसे लगा सकते हैं, यह एक ऐसी प्रेम कहानी है जो यकीनन आपके इमोशन्स को जीत लेगी।
हम इस फिल्म को देते हैं 5 में से 4 स्टार।
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