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आजकल थाइरॉइड की बीमारी बहुत महिलाओं में पाया जा रहा है। यह बीमारी पुरुषो की मुकाबले महिलाओं में ज्यादा होता है।हमारे गले में एक ग्रन्थि होती है जिसे थाइरॉइड ग्रंथि कहते है जो थाइरॉक्सिन नाम की होर्मोन्स बनाती है।
जब ये ग्रन्थि कभी कभी ज्यादा या कम हॉर्मोन्स बनाती है तो इसे थॉयराइड की समस्या कहते है। ये हॉर्मोन्स की गड़बड़ी, आयोडीन की कमी के वजह से होती है।
थाइरॉइड दो प्रकार के होते हैं। हाईपोथाइरॉइड और हाइपरथाइरॉइड। हाइपोथाइरॉइड में हॉर्मोन्स बहूत धीमी बनते है, जिसकी वजह से वजन अपने आप बढ़ने लगता है, बाल झड़ने लगते है, ठण्ड ज्यादा लगती है , माहवारी अनियमित हो जाती है , गर्भ धारण करने में दिक्कत होती है।
हाइपरथाइरॉइड में हार्मोन्स बहूत ज्यादा बनते है, जिसकी वजह से वजन कम होने लगता है, स्किन और नाख़ून रूखे हो जाते है, गर्मी ज्यादा लगती है, माहवारी में ब्लीडिंग ज्यादा होती है और मिस्करेज के भी चांस होते हैं।
जिन लोगो को थाइरॉइड की समस्या हो उन्हें दवाई हमेशा खानी चाहिए। उसके साथ साथ कुछ बातो पर ध्यान देने से वो इस समस्या को जल्दी ठीक कर सकते है। जिन लोगो को थाइरॉइड हो उन्हें रोज सुबह खाली पेट एलोविरा जूस पीना बहूत फायदेमंद होता है। भुनी हुई अलसी को रोज सुबह खली पेट खाने से भी इस समस्या को कम किया जा सकता है।
अख़रोट और मुलैठी भी थाइरॉइड को ठीक करने में बहूत मदद मिलती है। थाइरॉइड में कभी भी कुछ चीजे है जिसे नहीं खानी चाहिए। जैसे - मूली, बंद गोभी, गाजर नही खानी चाहिये। खट्टी और ठंडी चीजो से भी परहेज करना चाहिये।
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