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बीते शुक्रवार रिलीज हुई शाहिद कपूर और कियारा आजवाणी की फिल्म ‘कबीर सिंह’ बाक्स ऑफिस पर धुआधांर कमाई कर रही है। 60 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने वीकेंड में ही 70 करोड़ का आकड़ा पार कर लिया है, जाहिर है फिल्म बेहतर प्रर्दशन कर रही है। फिल्म का क्रेज लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है, लेकिन अगर बॉक्स ऑफिस की कमाई से इतर अगर आप इस फिल्म के बारे में जरा भी गंभीरता से विचार सोचते हैं, तो ये फिल्म कुछ बातों में बुरी तरह से निराश करती है। जी हां, हो सकता है आपने अब तक कबीर सिंह की तारीफ में कई बातें सुनी होगी और आपने इसे देखने का मन बना लिया हो, पर वास्तव में इस फिल्म में ऐसी कई सारी बातें जिसके चलते ये फिल्म गैर काबिल-ए-बर्दाश्त है। जैसे कि
लवस्टोरी के नाम पर मिलेगा छलावा
जबसे साउथ की सुपरहिट फिल्म 'अर्जुन रेड्डी' के हिंदी रीमेक कबीर सिंह के बनने की बात सामने आई थी, तबस से इस फिल्म का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था कि एक इंटेस लव स्टोरी देखने को मिलेगी। फिर जब फिल्म के ट्रेलर और गाने आए तो इसके लिए और भी अच्छा खास माहौल बन गया। लेकिन अब जब ये फिल्म बनकर सामने आ चुकी हैं, तो देखने वाली बात ये है कि आपको लव स्टोरी के नाम पर छलावा से अधिक कुछ नहीं है।
फिल्म में हीरो प्यार में जुनून की सारी हदें पार करता है, लेकिन फिर भी उसका ये प्यार पर्दे पर वो रुमानी एहसास नहीं कराता जो कि एक लव स्टोरी देख कर आम तौर पर होता है। फिल्म में प्यार के अहसास के नाम पर किसिंग सीन्स की भरमार है, प्यार के लिए जायज भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं है। फिल्म में हीरो का एकतरफा प्यार कब हीरोइन के दिल तक पहुंचता है, इसका कोई जिक्र तक नहीं आता है, हीरोइन सीधे तौर पर हीरो को आत्म समर्पण करती दिखती है।
प्यार के नाम पर शोषण
इस लवस्टोरी में जो बात सबसे अधिक खलती है वो है, इसमें प्यार के नाम पर दिखाया जाने वाला शोषण। कॉलेज में हीरोइन को देखते ही हीरो को पहली ही नजर में उससे प्यार हो जाता है, यहां तक को बात हजम हो जाती है, पर इसके बाद बिना लड़की की पसंद ना पसंद जाने, जिस तरह से वो उस पर हक जताता है और फिर कॉलेज के सारे नियम ताक पर रखकर उसके साथ रोमांस करता है वो कहीं से भी आपको जायज नहीं लगेगा। चलो अगर यहां तक भी आप इसे प्यार में दीवानगी के नाम पर स्वीकार कर लें, तो फिर उसका लड़की को ये कहना कि उसका अपना कोई वजूद नहीं और कॉलेज में लोग उसे सिर्फ़ इसलिए जानते हैं क्योंकि वो कबीर सिंह की बंदी है। ये बात आज के समय में किसी लड़की के लिए कहना या सुनना ही अपने आप में गलत लगता है।
अब तक हिंदी फिल्मों में आमतौर पर विलेन हीरोइन के साथ बुरा बर्ताव करते देखे जाते रहे हैं और ये डायलाग्स भी उन्ही के मुंह से सुना जाता रहा है कि तु मेरी ना हुई तो किसी और की भी नहीं होने दुंगा, पर इस फिल्म में हीरो काफी कुछ ऐसे ही विलेन के किरदार में दिखता है, जो लड़की पर प्यार के नाम पर अधिकार और धौंस जताते दिखता है।
हीरोपंती के नाम पर महिलाओं के साथ बदसलूकी
फिल्म का हीरो सिर्फ हीरोइन के साथ ही बदसलूकी नहीं करता है, बल्कि बाकी महिलाओं के साथ भी ऐसा ही बर्ताव करता है। सिर्फ एक कांच का ग्लास टूट जाने पर अपनी काम करनेवाली बाई को घर के बाहर तक दौड़ा कर आता है, अपनी दादी को सबके सामने डांट लगाता है और फिर वहीं जब एक एक्ट्रेस उसके सामने अपने प्यार का इजहार करती है, तो उसे खुलेआम बेइज्जत भी कर डालता है।
दबंगई की आजादी
कबीर सिंह में नायक गुस्सैल शख्स के किरदार में है, जो दबंगई झाड़ने के लिए सही-गलत कुछ भी करता है। कॉलेज में डीन के साथ सबके सामने झड़प करता है, किसी को भी मारने के लिए सीधा गमला उठा लेता है। उसे ना रिश्तों की मर्यादा समझ आती है, दोस्ती का स्नेह। वो सिर्फ अपनी ही करता रहता है, लेकिन चूकिं वो नायक है इसलिए उसके सात खून माफ है। यहीं नही उसके इस गुस्से और पागलपन के लिए क़सूरवार लहराई जाती है उसकी प्रेमिका। कि उसका बिछड़ना ही लड़के की बर्बादी की वजह है । सीध तौर पर कहा जाए तो ये लव स्टोरी नहीं प्यार में पागलपन की इंतहां है।
Author: Yashodhara Virodai
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