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कई लोग बातचीत में हमेशा ज़हर उगलते रहते हैं। मज़े की बात तो यह है कि ये सब उनकी आदत में शुमार होता है। आपको बता दें कि यदि आप भी उनमें से एक हैं तो ठहर जाइए, क्योंकि मनोवैज्ञानिकों का साफ़तौर पर मानना है कि यह एक मानसिक बीमारी है, जो किसी भी व्यक्ति को धीरे-धीरे नकारात्मक बनाती चली जाती है। जैसे किसी भी इंसान का एक इंसान के साथ जुड़ाव और अलगाव उसकी शख़्सियत या व्यक्तित्व तय करता है। एक इंसान किसी इंसान के लिए बहुत अच्छा हो सकता है तो वही इंसान किसी और के लिए बहुत ख़राब भी हो सकता है। लेकिन इन सभी के बीच एक ऐसा व्यक्तित्व भी होता है, जो सभी के लिए परेशानी का सबब बनता है।
आपको बता दें कि इस तरह के व्यक्तित्व के स्वामी को टॉक्सिस, विषाक्त या ज़हरीला कहा जाता है। जिस तरह से साँप की हर स्थिति में एक ही फितरत होती है, ज़हर उगलने की ठीक वैसे ही टॉक्सिस पर्सनालिटी वाले लोग अपने आसपास के लोगों और माहौल में नकारात्मकता का संचार करते हैं। दिलचस्प है कि इस तरह के व्यक्तित्व को कुछ ख़ास तरह के लक्षणों से पहचाना भी जा सकता है। ऐसे लोग मानसिक और भावनात्मक तौर पर थकाने वाले, असहयोगात्मक रवैया रखने वाले, बात करने के दौरान लगातार टोकने वाले और अपने ही बारे में बात करने वाले होते हैं।
दिल्ली के मनोवैज्ञानिक प्रो. अरविंद मिश्र एक अख़बार को बताते हैं कि ऐसे लोगों के पीछे का कारण उनका पालन-पोषण सही न होना तथा रहन-सहन ठीक न होना होता है। वास्तव में इस वैश्विक नवउदारवाद के दौर में नॉरसिस्ट यानी कि आत्ममुग्धता यानी आत्मरति का स्वभाव लोगों में तेज़ी से बढ़ा है। यह भी इसके सबसे महत्वपूर्ण कारणों में से एक है।
Author: Amit Rajpoot
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