Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
लोग बिना हेलमेट के क्यों चलते हैं, जबकि उन्हें पता है कि सड़क पर यही उनकी सुरक्षा है वास्तव में एक मर्म जैसा लगता है। आपको बता दें कि सड़क पर ग़लत दिशा में गाड़ी चलाना, लाल बत्ती को दरकिनार करके ट्रैफ़िक नियमों की अलहेलना करना एक आम बात हो गयी हैं, जो कि लोगों की प्रक्टिस में है। इन सबका मिलाजुला परिणाम बहुत घातक होता है। आपके सिर पर हेलमेट मात्र का न होना आपका सड़क में ज़िन्दगी को हाथ में लेकर चलने जैसा है। इसकी एक ग़लती आपका पूरा जीवन बदल सकती है। ऐसी ही एक ज़िन्दगी राघवेंद्र कुमार की भी बदली, लेकिन यह बदलाव सकारातमक है। हालाँकि इसके पीछे उनके जिगरी दोस्त के जीवन की क़ुर्बानी की दास्तान है।
जी हाँ, आपको बता दें कि राघवेंद्र मूलतः बिहार के रहने वाले हैं, जो नोएडा की एक कंपनी में कार्यरत हैं। साल 2014 की बात है, इनके दोस्त कृष्ण कुमार ठाकुर मोटरसिकिल से कहीं जा रहे थे, रास्ते में किसी बड़े वाहन ने इनकी मोटरसाइकिल में पीछे से टक्कर मार दी और इनके दोस्त को गंभीर रूप से चोटें आ गयीं।
राघवेंद्र कुमार जब अस्पताल पहुँचे तो डॉक्टर ने इन्हें बताया कि यदि आआपका दोस्त हेलमेट पहना होता तो शायद आज जीवित होता। इस घटना ने राघवेंद्र कुमार को भीतर तक हिलाकर रख दिया और तभी इन्होंने ठाना कि अपने माँ-बाप के इकलौते बेटे कृष्म कुमार ठाकुर जैसे वो किसी को भी इस तरह से मरने नहीं दे सकते हैं और सका उपाय है हेलमेट पहनकर गाड़ी चलाना।
दिलचस्प है कि राघवेंद्र कुमार ने इसे अभियान बनाया और लोगों को मुफ्त में हेलमेट बाँटना शुरू कर दिया। इससे कई लोगों को लाभ हुआ। एक दिन राघवेंद्र कुमार अपने दोस्त की माँ के पास जाकर कृष्ण की पुस्तक ले आये और उन्हें ज़रूरतमंद बच्चों को दे दिया।
धीरे-धीरे राघवेंद्र कुमार को यह रियलाइज़ हुआ कि क़िताबों की ज़रूरत अनेक ग़रीब बच्चों को होती है, इसलिए अब वह लोगों से पुरानी पुस्तकें लेकर उन्हें हेलमेट देने लगे और इस तरह से राघवेंद्र कुमार ने इन सब कामो को करने के लिए अपना घर तक बेट दिया।
Author: Amit Rajpoot
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop App, वो भी फ़्री में और कमाएँ ढेरों कैश आसानी से!
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.