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पीटी उषा देश और दुनिया का एक जान-माना नाम है। इन्हें किसी परिचय की ज़रूरत नहीं है। पीटी उषा एक महान एथलीट थीं, जिन्होंने साल 1979 से लेकर क़रीब दो दशकों तक भारत को अपने प्रतिबा के चलते सम्मान दिलाया था। इस तेज़ दौड़ने वाली लड़की का कोई जवाब नहीं है। इनकी छवि का जो रुतबा क़ायम है से आप इस तरह से समझ सकते हैं, कि आज भी जब बच्चों से पूछा जाता है कि सबसे तेज़ दौड़ने वाला भारतीय कौन है, तो लोग फटाफट पीटी उषा का ही नाम लेते हैं। आपको बता दें कि पीटी उषा का पूरा नाम पिलावुल्लकण्टि तेक्केपरम्पिल् उषा है। इनका जन्म 27 जून, 1964 को केरल कोझिकोड ज़िले के पॉयोली गाँव में हुआ था और आज पीटी उषा आज अपना 55वाँ जन्म दिन मना रही हैं।
पीटी उषा को इनके असाधारण प्रदर्शन के लिए क्वीन ऑफ़ इंडियन ट्रैक, सुनहरी कन्या, उड़नपरी तथा पॉयोली एक्सप्रेस जैसे नामों से भी जाना जाता है। आपको बता दें कि 55 वर्षीय पीटी उषा अब केरल में ही एक एथलीट स्कूल चलाती हैं, जहाँ ये अपनी प्रतिभा का ज्ञान दूसरे बच्चों में बाँटने का काम कर रही हैं। पीटी उषा को भारत सरकार ने पद्मश्री के सम्मान से भी नवाजा है। पीटी उषा के जीवनसाथी वी. श्रीनिवासन हैं।
आपको बता दें कि साल 1971 में पीटी उषा ने राष्ट्रीय विद्यालय खेलों में भाग लिया था, जहाँ ओएम नंबियार का उनकी ओर ध्यानाकर्षित हुआ, वे पीटी उषा के कोच हो गये और अंत तक उनके प्रशिक्षक रहे। साल 1983-89 के बीच में उषा ने एटीऍफ़ खेलों में 13 स्वर्ण जीते। 1984 के लॉस ऍंजेलेस ओलम्पिक की 400 मीटर बाधा दौड़ के सेमी फ़ाइनल में वे प्रथम थीं, पर फ़ाइनल में पीछे रह गईं। 400 मीटर बाधा दौड़ का सेमी फ़ाइनल जीत के वे किसी भी ओलम्पिक प्रतियोगिता के फ़ाइनल में पहुँचने वाली पहली महिला और पाँचवी भारतीय बनीं।
Author: Amit Rajpoot
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