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भारतीय सिनेमा का एक बेहद महत्वपूर्ण पक्ष है इसका गीत-संगीत... फिल्मों की लोकप्रियता में उसके गानों बड़ी भमिका निभाते हैं और हिंदी सिनेमा ऐसे में एक से बढ़कर एक ऐसे संगीतकार रहे हैं, जिन्होने अपनी धुन और आवाज के जरिए सदाबहार नग्में बनाए हैं। आर डी बर्मन का नाम इस लिस्ट में सबसे पहले आता है, जिन्होने 350 से अधिक फिल्मों को अपने संगीत से सजाया है।
आर डी बर्मन का जन्म 27 जून 1939 को हिंदी सिनेमा को मशहूर संगीतकार सचिन देवबर्मन के घर में हुआ था। वहीं पंचम दा की मां मीरा देवबर्मन भी एक गीतकार थीं। ऐसे में आर जी बर्मन संगीत तो को विरासत के रूप में मिली थी। कहते हैं आर दी बर्मन को पंचम उपनाम भी इसलिए मिली था कि जब वो बचपन में रोते थे तो पंचम सुर की ध्वनि सुनाई देती थी, ऐसे में उनका उपनाम पंचम दा पड़ गया। मां-बाप में विरासत में मिली इस संगीत की कला का उन्होने अपनी प्रतिभा के दम पर पूरी दुनिया में लोहा मनवाया था। आज पंचम दा के जन्मदिन के मौके पर हम आपके लिए उनके कुछ सदाबहार नग्में लेकर आए हैं।
दम मारो दम
साल 1971 में आई फिल्म 'हरे कृष्णा हरे राम' में ज़ीनत अमान पर फिल्माया गया ये गाना उस दौर में भारतीय रॉक संगीत में एक मील का पत्थर साबित हुआ। आशा भोसले की आवाज और पंचम दा के संगीत ने साथ ये गाना इतना बेहतरीन पड़ा था, कि फिल्म 'हरे कृष्णा हरे राम' जब रिलीज हुई तो सबसे अधिक चर्चा इसी गाने की हुई। आज के समय में इस गाने के कई सारे रिमिक्स आ चुके हैं, लेकिन ओरिजनल गाने के बात ही कुछ और है।
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'चुरा लिया है तुमने जो दिल को
साल 1973 में आई फिल्म 'यादों की बारात' का ये सॉन्ग जितना उस वक्त में सुपरहिट साबित हुआ था, उतना ही आज के समय में भी पापुलर है।
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महबूबा ओ महबूबा
पंचम दा के गाने की बात की जाए तो फिल्म शोल के गाने महबूबा ओ महबूबा को कैसे भल सकते हैं, इस गाने के लिए ना सिर्फ पंचम दा ने धुन बनाई थी, बल्कि इसमें उन्होने अपनी आवाज भी दी थी। ऐसे में ये गाना काफी आकर्षक बन पड़ा था।
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मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास है
1987 में आई फिल्म इजाजत फिल्म का ये गाना भी पंचम दा के बेहतरीन नग्मों में से एक है।
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खामोश सा अफसाना पानी से लिखा होता
साल 1988 में आई फिल्म लिबास के ये गीत पंचम दा के संगीत के साथ काफी मशहूर हुआ था। आज भी इसे हिंदी सिनेमा के बेहतरीन गानों में से एक माना जाता है।
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तुम आ गए हो नूर आ गया है
साल 1975 में आई 'आंधी' में पंचम दा का कंपोज किया गाना ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा नहीं’ आज भी सुना जाता है।
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रोज-रोज आंखो तलें
साल 1986 में आई फिल्म जीवा का ये गीत पंचम दा के संगीत के सुरो के साथ बेहतरीन बन पड़ा था।
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Author: Yashodhara Virodai
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