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यूपी और बिहार में चमकी बुखार सैकड़ों बच्चों की जान ले चुका है और इसके लिए काफी कुछ वहां की पिछड़ी स्वास्थय व्यवस्था जिम्मेदार हैं। वैसे कमोबेश देश के सभी राज्यों का यही हाल है... हाल ही में आई नीति आयोग की रिपोर्ट तो राज्यों के स्वास्थ्य व्यवस्था का कुछ ऐसा ही हाल बयान कर रही है। जी हां, नीति आयोग की रिपोर्ट में भारत के सभी राज्यों की स्वास्थ्य व्यवस्था के जो आकड़े सामने आए हैं, वो काफी निराशाजनक है। चलिए आपको इस रिपोर्ट के बारे में जरा विस्तार से बताते हैं।
असल में केंद्रिय स्वास्थ्य-परिवार कल्याण मंत्रालय और विश्व बैंक के सहयोग से तैयार हुए इस रिपोर्ट में काफी चौकाने वाले खुलास हुए हैं। दरअसल, ‘स्वस्थ्य राज्य प्रगतिशील भारत’ नाम के शीर्षक से सामने इस रिपोर्ट में देश के सभी राज्यों के स्वास्थ्य सेवाओं का ब्योरा जारी किया गया है कि किस राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था में कितना सुधार हुआ और उसी हिसाब से उसे तुलनात्मक रैंकिंग भी दी गई है।
इस रिपोर्ट में रैंकिंग के साथ ही राज्यों को तीन श्रेणी में बांटा गया है, जिसमें पहली श्रेणी में 21 बड़े राज्य और दूसरी श्रेणी में 8 छोटे राज्यों को तो वहीं तीसरी श्रेणी में केंद्र शासित राज्यों को रखा गया है। ऐसे में बड़े राज्यों में केरल जहां नम्बर वन पर है तो वहीं यूपी-बिहार जैसे राज्य काफी पिछड़े हुए हैं। जी हां, शिक्षा में अव्वल राज्य केरल यहां भी नम्बर वन पर कायम है, लेकिन वहीं देश की सत्ता में अहम स्थान रखने वाला राज्य यूपी का हाल बेहाल है।
नीति आयोग की इस रिपोर्ट के अनुसार साल 2015-16 के मुकाबले 2017-18 में बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था के संपूर्ण प्रदर्शन का सूचकांक 6.35 अंक गिरा है। वहीं यूपी के प्रदर्शन में भी 5.08 अंक की गिरावट आई है। यहीं नहीं उत्तराखंड के प्रदर्शन में भी 5.02 अंक गिरावट आई है। जबकि वहीं हरियाणा, राजस्थान और झारखंड जैसो राज्यों में स्वास्थ्य व्यवस्था के हालात सुधरे हैं। वहीं इस लिस्ट में दिल्ली पांचवें स्थान पर है।
Author: Yashodhara Virodai
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