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शिक्षा हर किसी के लिए एक अति आवश्यक चीज़ है, जो किसी भी क़ीमत पर सभी को मिलनी ही चीहिए। अन्यथा बिना शिक्षा के तो हर इंसान पशु की तरह ही रह जाता है। कहने का मतलब साफ है कि बिना शिक्षा के व्यक्ति पशु के समान है, क्योंकि शिक्षा से प्राप्त होने वाला विवेक न तो एक पशु में होता है और न ही किसी अनपढ़ व्यक्ति में। इसीलिए शिक्षा को हमारे देश में मौलिक अधिकार की श्रेणी में रखा गया है। लेकिन इसे हमारे समाज की विकृति कहें या फिर विद्रूपता कि आज भी हमारे देश के कई कोनों में ऐसे बच्चे हैं, जो शिक्षा से पूरी तरह वंचित हैं।
इन वंचितों की श्रेणी में कोल राजधानी धनबाद के आसपास के इलाक़ों के बच्चे भी शामिल हैं। यहाँ के बच्चों का पूरा दिन कोयले के इर्द-गिर्द ही घूमता रहता है, इसलिए इनकी शिक्षा पर किसी का कोई ध्यान नहीं है। ऐसे में धनबाद ज़िले के कतरास गाँव के रहने वाले देव कुमार वर्मा ने यहाँ के बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उटा लिया और इन्हें अपने पैतृक गाँव के एक ख़ाली घर में फ़्री में पढ़ाने लगे। शुरुआत में देव कुमार वर्मा के पास ट्यूशन लेने केवल 5 ही बच्चे पहुँचे। लेकि बाद में ये संख्या बढ़कर जब 100 हो गयी तो देव कुमार वर्मा को उत्साह मिला।
आपको बचा दें कि देव कुमार वर्मा का उद्देश्य बच्चों को बिना किसी शुल्क के गुणवत्तायुक्त प्राथमिक शिक्षा देना है। इसलिए ये झारखण्ड के कोलबेल्ट के बच्चों को 5वीं कक्षा तक अंग्रेज़ी माध्यम में बिना किसी शुल्क के शिक्षा देते हैं। क़रीब 40 किलोमीटर के इस इलाक़े में देव कुमार वर्मा ने तीन शाखाएँ खोल रखी हैं, जिनमें 500 से अधिक बच्चे पढ़ाई करते हैं। दिलचस्प है कि इन स्कूलों में प्रोजेक्टर, लैपटॉप, बायोमीट्रिक हाज़िरी, एक्वागार्ड कूलर, खेल के मैदान और लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय जैसे सुविधाएँ उपस्थित हैं।
Author: Amit Rajpoot
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