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सूर्य की रोशनी पौधों के जीवन का आधार होती है। ये बात भी हमें स्कूलों में बताई जाती है कि सूर्य की रोशनी से पौधे ऊर्जा प्राप्त करते हैं और उसी के सहारे उगते हैं। लेकिन हमें ये नहीं सिखाया जाता है कि सूर्य की रोशनी हमारे लिए कितनी अधिक आवश्यक होती, जबकि सूरज की रोशनी जीवन देने वाली होती है। आपको बता दें कि सूरज की रोशनी की एक किरण भी धरती पर पड़ने भर से सब कुछ खिल जाता है, समूची पृथ्वी जीवंत हो उठती है। चारो ओर प्राण ऊर्जा का संचार हो जाता है। ग़ौरतलब है कि यदि सूरज की रोशनी को सही समय, सही मात्रा और सही ढंग से हमने ग्रहण करनी शुरू कर दी तो वही ऊर्जा जो पौधों को मिलती है, हमें मिलना शुरू हो जाएगी।
आपको बता दें कि सूर्य की रोशनी से ऊर्जा ग्रहण करने का उपाय बहुत ही आसान है और इस ऊर्जा से हम सर्वाइकल, जोड़ों का दर्द, थॉयराइड, डायबिटीज़, उच्च रक्त चाप और स्किल की अनेक समस्याओं को जड़ से दूर कर सकते हैं। इतनी ही नहीं, यदि हम सही समय पर सूर्य का दर्शन करें तो इसकी सीधी रोशनी हमारी आँखों के माध्यम से सीधे हमारे दिमाग़ तक पहुँची है, जिससे हमारा फोकस और कंसंट्रेशन बढ़ता है। मालूम हो कि आँख को दिमाग़ की खिड़की कहा जाता है।
वास्तव में सूर्य हमारे शरीर की बायोलॉजिकल ज़रूरत है। इसके न मिलने पर हमारे सबी बॉडी पार्ट्स नॉर्मल तरीक़े से काम करना बंद कर देते हैं। इसलिए हमें बंद कमरों से निकलकर माँ प्रकृति के साथ वापस जुड़ना है। ऋग्वेद में तो सूर्य के बारे में यहाँ तक कहा गया है कि सूर्य कोई भी बीमारी ख़त्म कर सकता है। इतिहास गवाह है कि विश्व युद्ध के समय जर्मनी की सेना ने सूर्य की रोशनी के सहारे ही अपने घायल सिपाहियों के घावों को ठीक करने की युक्ति अपनाई थी।
Author: Amit Rajpoot
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