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बच्चों को उनकी अवस्था में आप अगर आज ध्यान से अपने आसपास देखें तो पाएंगे कि उन्हें नैपकिन या ऐसी ही अन्य चीज़ों की ज़रूरत होती है। ऐसे ही किशोरवय बालकों को किशोरपन से संबंधित चीज़ों की समस्या होती है। जवानी में जवानी वाली, प्रौढ़ावस्था में प्रौढ़ों की समस्या और बुढ़ापे में बुढ़ापे की समस्या हमें घर कर जाती है। ये बड़ा ही आसान सा ऑब्ज़र्वेशन है और बहुत ही स्वाभाविक व सरल भी। ऐसा हम जब चाहें देख सकते हैं। जीवन का कोई भी ऐसा चरण नहीं है जहाँ पर इंसान को ख़ुशी हो। वास्तव में हर कोई अपने-अपने लिए किन्ही कारणों से दुःखी है और इसीलिए किसी ने ये सिद्धांत दिया कि जीवन दुःख है।
इसी प्रकार ये भी सच है कि माँ-बाप अपने बच्चे को लेकर इतना परेशान या दुःखी वास्तव में होते नहीं है। आपको बता दें कि यही माँ-बाप जब इन्हें बच्चे नहीं होते हैं, तो भी ये लगातार दुःखी होते हैं। ऐसे ही जब इनको बच्चे हो जाते हैं तो फिर ये उन्हें लेकर और भी परेशान रहने लग जाते हैं। इसलिए समझने वाली बात यह है कि वास्तव में जो लोग ये कहते है कि हमारे माँ-बाप बच्चों को लेकर परेशान रहते हैं, वो झूठ है, क्योंकि इसकी सच्चाई यह है कि ये माँ-बाप असल में बस इतना नहीं समझ पाये हैं कि ख़ुद को कैसे संभाले।
हर माँ-बाप आज अपने बच्चों को लेकर इसलिए परेशान रहता है, क्योंकि वह चाहते हैं कि उनका बेटा किसी से अव्वल हो या किसी से आगे हो, जबकि उन्हें यह चाहिए कि वह अपने बच्चे को लेकर सोचें कि उसका जीवन ख़ूबसूरत हो और वह इससे आनन्दित हो, जिसमें वह अपनी पूरी क्षमता के साथ जिये। आपको बता दें कि जो माँ-बाप ऐसा करने में सफ़ल हो जाते हैं या फिर सक्षम होते हैं, वो हमेशा ख़ुशी से रहते हैं और सुखी जीवन जीते हैं।
Author: Amit Rajpoot
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