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आजकल लोग जैसी लाइफ स्टाइल जी रहे हैं उसके चलते उनमें दिल की बीमारियों का खतरा काफी हद तक बढ़ चुका है। ऐसे में हर साल लाखों लोग इसके चलते मौत के मुंह में जा रहे हैं। वैसे मेडिकल साइंस भी इसकी रोकथाम के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही है और इस दिशा में मेडिकल साइंस के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगी है। दरअसल, मेडिकल साइंस ने वैज्ञानिको ने एक ऐसे बैक्टीरिया का पता लगाया है, जो कि काफी हद तक दिल की बीमारियों का खतरा कम कर सकता है।
असल में, लौवेन यूनिवर्सिटी में हुई एक रिसर्च में एक ऐसे जीवाणु का पता चला है जो कि दिल की बीमारियों से सुरक्षा देता है। अक्करमेंसिया म्यूसिनीफिला नाम का ये जीवाणु मानव आंत्र में पाया जाता है। असल में पत्रिका 'नेचर मेडिसिन' में प्रकाशित इस शोध में लौवेन मानव शरीर में प्रभावी सभी बैक्टीरिया पर व्यापक अध्ययन किया गया। इसके लिए उन्होने 32 ऐसे मोटे प्रतिभागियों को लिया, जिनमें डायबिटीज टाइप 2 और मेटाबोलिक सिंड्रोम देखे गए।
असल में, शोधकर्ताओं ने अक्करमेंसिया म्यूसिनीफिला नाम के इस जीवाणु के पास्चुरीकरण के रूप में उपयोग करने से कई तरह के हृदय रोग के जोखिम कारकों से कम कर सकता है। असल में, इन सभी प्रतिभागियों को तीन समूहों में बांट दिया गया और उनमें से पहले समूह को जीवित बैक्टीरिया दिया गया और वहीं बाकी पास्चुरीकृत बैक्टीरिया लिया। साथ ही सभी समूहों के सदस्यों को अपने खान-पान और लाइफ स्टाइल में आवश्यक बदलाव लाने के लिए कहा गया।
ऐसे में इस शोध के नतीजे के रूप में ये पाया गया कि पास्चुरीकृत बैक्टीरिया का सेवन करने वाले प्रतिभागियों में दिल की बीमारियों का खतरे काफी हद तक नियंत्रित हो गया। साथ ही इससे लिवर के सेहत में सकारात्म बदलाव देखा गया, इसके अलावा प्रतिभागियों के वजन में भी गिरावट देखी गई जिससे उनके कोलेस्ट्रोल के स्तर में भी कमी आई। यानी कि ये बैक्टीरिया काफी हद तक दिल की बीमारियों का खतरा रोक सकता है।
Author: Yashodhara Virodai
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