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जी हां, एनडीए सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट शुक्रवार को पेश होने जा रहा है... केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पहली बार ये बजट पेश करने जा रही है। वैस तो इस बजट से तमाम नई चीजों की उम्मीद की जा रही है, लेकिन इस बजट में जो अविश्वसनीय बदलाव देखने को मिला है, वो है इसका पुरानी परंपराओं को पीछ छोड़ते हुए बजट के दस्तावेजों को इस बार ब्रीफकेस में नहीं बल्कि इसे एक लाल रंग के कपड़े में लेपट कर पेश किया जा रहा है, जिस पर अशोक चिन्ह भी दिख रहा है। हम यहां अविश्वसनीय इसलिए कह रहे हैं क्योंकि बैग के चलते ही बजट शब्द चलन में आया था, पर अब वो बैग ही परम्परा में नहीं रहा। चलिए आपको बजट शब्द के चलन और बैग के उपयोग में लाए जाने ऐतिहासिक परम्परा के बारे में जरा विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, संसद की परम्परा की असली जननी ब्रिटिश है और बजट पेश करने के लिए बैग के चलन को भी ब्रिटेन की संसद ने शुरू किया था। असल में 1733 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री) रॉबर्ट वॉलपोल ने जब वहां की संसद में पहली बार देश की आर्थिक व्यवस्था का लेखाजोखा पेश किया था, तो वो एक चमड़े के बैग में अपना भाषण और उससे सम्बंधित दस्तावेज रखकर लाए थे और यही चमड़े का बैग फ्रेंच भाषा में बुजेट कहलाता है। ऐसे में यहीं से पहले बुजेट और फिर बाद में बजट शब्द का चलना शुरू हो गया।
चूंकि भारत में तो ब्रिटीश शाषन का काल ही रहा है, ऐसे में यहां कि संसद में कई सारी ब्रिटीश परम्पराओं को अपनाया गया है। बजट के लिए बैग का चलन भी यहां ब्रिटीश संसद से लिया गया है, अब तक इससे पहले सभी वित्त मंत्री बैग में ही दस्तावेज रखकर सदन में पहुंचते रहे हैं, जहां उनके पहुंचने पर बाकी सांसद कहते हैं... 'बजट खोलिए, देखें इसमें क्या है।'
लेकिन अब ये परम्परा आज से खत्म हो चली है, अब बैग में नहीं बल्कि लाल रंग के कपड़े में बजट पेश किया जाएगा, जिसकी शुरूआत देश की वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कर दी है।
Author: Yashodhara Virodai
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