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अब तक किसी बड़े शख्सियत के नाम पर सड़कों, अस्पतालों के नामकरण की परम्परा चलती आ रही है, लेकिन वर्तमान सरकार अब इस परम्परा को बदलते हुए देश के आम नागरिक के लिए ऐसे सम्मान की नई परम्परा शुरू करने जा रही है। दरअसल, मोदी सरकार ने करदाताओं का हौसला बढ़ाने के लिए ये नया चलन शुरू किया है, जिसके तहत सबसे अधिक टैक्स पे करने वालों को सरकार ने सम्मानित करने का फैसला किया है। जी हां, अब किसी भी उस शख्स के नाम सड़को और दूसरे सार्वजनित सेवाओं का नाम पड़ सकता है, जो कि सर्वाधिक टैक्स पे करता है।
दरअसल, एनडीए सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट शुक्रवार को पेश किया जा रहा है, जिसे केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पहली बार पेश कर रही हैं। इससे पहले बीते गुरूवार को वित्त मंत्री ने गुरुवार को संसद में वर्ष 2018-19 की आर्थिक समीक्षा पेश कीं है, जिसमें मौजूदा वित्त वर्ष की कई सारी बातें सामने आई हैं। जैसे कि मौजूदा वित्त वर्ष में 7 फीसदी GDP ग्रोथ का अनुमान लगाया है। वहीं इस सर्वे में मोदी सरकार के कुछ सराहनीय कदम की भी बात की गई है, जैसा कि अब सरकार देश के टैक्सपेयर्स का हौसला बढ़ाने के लिए ये नया कदम उठा रही है।
असल में, इस आर्थिक सर्वे में सबसे अधिक कर देने वालों को सम्मानित करने की पहल की बात की गई है। यानी कि अब देश के टॉप 10 टैक्सपेयर्स को सम्मान किया जाएगा और उन्हें किसी वीआईपी जैसे एयरपोर्ट पर बोर्डिंग प्रिविलेज और सड़कों पर फास्ट लेन प्रिविलेज जैसी सुविधाएं देने की बात कही गई है। इसके अलावा बीते एक दशक में सबसे अधिक कर देने वाले के नाम पर स्मारक, सड़क, स्कूल-यूनिवर्सिटीज और अस्पताल जैसे सार्वजनिक संस्थाओं के नाम रखने की भी सलाह दी गई है।
असल में, इस आर्थिक समीक्षा में ये भी बताया गया है कि बीते पांच वर्षों के दौरान सिर्फ अमीर लोगों को मिलने वाले लाभ को देश के गरीबों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है, जिससे देश की विकास और अर्थव्यवस्था में हुई स्थिरता का लाभ आखिरी पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंच सका है।
Author: Yashodhara Virodai
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