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स्कोप के दृष्टिकोण से देखा जाये तो आज मेडिकल साइंस में भारी संभावनाएँ नज़र आ रही हैं, क्योंकि मेडिकल साइंस दिन-ब-दिन काफ़ी तेज़ी के साथ तरक्की कर रहा है। आपको बता दें कि तकनीक के समावेश ने तो जैसे मेडिकल साइंस की तस्वीर ही बदलकर रख दी है। जी हाँ, दिलचस्प है कि आज जहाँ नैनो टेक्नोलॉजी से कैंसर का इलाज ढूँढ़ने की बात की जा रही है, वहीं बायोटेक्नोलॉजी, बायोइंफॉर्मेटिक्स आदि से मेडिकल क्षेत्र को नई पहचान मिली है। ऐसे में मेडिकल के क्षेत्र में बायोकेमिस्ट्री भी एक नये विषय के तौर पर उभरकर सामने आया है।
आपको बता दें कि बायोकेमिस्ट्री का कार्यक्षेत्र काफी विस्तृत है। बायोकेमिस्ट मेडिसिन, एग्रीकल्चर व न्यूट्रिशन के क्षेत्र में बायोकेमिस्ट डायग्नॉस्टिक्स टेस्ट और विभिन्न परीक्षणों के ज़रिए बामारियों का कारण ढूढ़ते हैं। फसलों की नई और बेहतर क़िस्म विकसित करना, कीटनाशकों से जुड़े पेस्ट कंट्रोल मैनेजमेंट व फसलों के सुरक्षित भंडारण को सुनिश्चित करने का कार्य भी बायोकेमिस्ट्री के तहत आता है।
बायोकेमिस्ट्री से जुड़े कोर्स में स्नातक स्तर पर दाख़िला लेने के लिए छात्र को विज्ञान वर्ग से 12वीं उत्तीर्ण होना चाहिए। इसेक बाद छात्र बीएससी इन बायोकेमिस्ट्री कर सकते हैं। उच्च शिक्षा के इच्छुक लोग एसएससी और पीएचडी स्तर पर भी अध्ययन कर सकते हैं। इसके लिए आप ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस, नई दिल्ली, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लूर, तमिलनाडु या फिर दिल्ली विश्वविद्यालय या मद्रास विश्वविद्यालय में प्रवेश ले सकते हैं।
Author: Amit Rajpoot
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