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संजना रूनवाल मुम्बई के बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल में कक्षा दसवीं की छात्रा हैं। ये साफ़-सफ़ाई करने वालों और कूड़ा बीनने वालों सफ़ाई कर्मचारियों को उपकरण बाँटती हैं। संजना रूनवाल ऐसा इसलिए करती हैं, ताकि अपनी ज़िम्मेदारी निभाते समय ये लोग सुरक्षित रहें। आपको बता दें कि कूड़ा बीनने वालों और सफ़ाई कर्मचारियों को सुरक्षित जीवन देने की शुरुआत संजना रूनवाल ने ‘क्लीन-अप फ़ाउंडेशन’ के साथ मिलकर मुफ़्त में सुरक्षा उपकरण बाँटने से की थी। ग़ौरतलब है कि ‘क्लीन-अप फ़ाउंडेशन’ संजना रूनवाल के भाई का ही एनजीओ है।
संजना रूनवाल ने ‘क्लीन-अप फ़ाउंडेशन’ को साथ लेकर एमसीजीएम द्वारा मुम्बई में कूड़ा-कचरा बीनने वालों और सफ़ाई कर्मचारियों पर किये गये सर्वेक्षण का अध्ययन किया तो पाया कि इनमें से लगभग चालीस प्रतिशत लोगों की प्रति व्यक्ति औसत आय पाँच सौ रुपये से भी कम है, जबकि सत्तर प्रतिशत लोग निरक्षर हैं। इसी अध्ययन में यह बात भी निकलकर सामने आयी कि तिरसठ प्रतिशत आबादी डेंगू, टीबी और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त है।
इसके बाद संजना रूनवाल ने इनके लिए फ़ाउंडेशन के साथ मिलकर केयर फ़ॉर क्लीनर्स नाम से एक अभियान चलाया और उससे जो फंड मिला उससे रेनकोट और गमबूट्स ख़रीदकर इन लोगों को मुफ़्त में बाँटे। संजना ने इनके लिए वॉटर प्यूरीफ़ायर भी लगवाए, जिससे 12,000 करम्चारियों को साफ़ पानी पीने की व्यवस्था हो गयी। आपको बता दें कि संजना रूनवाल की कोशिश है कि ये कचरा बीनने वालों की हर संभव मदद कर पायें।
Author: Amit Rajpoot
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