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जयपुर, जोकि राजस्थान की राजधानी है। जयपुर ‘गुलाबी नगरी यानी पिंक सिटी’ के नाम से भी जाना जाता है। जयपुर के लोगों के लिए शनिवार का दिन बेहद ही खास रहा। शनिवार को यूनेस्को ने जयपुर को विश्व धरोहर स्थल की सूची में जगह दी। इसके बाद खुद यूनेस्को और पीएम नरेंद्र मोदी ने इस खुशखबरी को ट्वीटर पर शेयर किया। जयपुर के शामिल हो जाने के बाद यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में भारत की विरासत स्थलों की संख्या 38 हो गई है। सबसे पहले भारत के अहमदाबाद को इस सूची में शामिल किया गया था।
वैसे तो इस बात में कोई दोराय नहीं कि आखिर क्यों जयपुर को इस लिस्ट में शामिल किया जाना चाहिए था। जयपुर की पहचान वहां स्थित राजघरानों और महलों से हैं, हर साल देश-दुनिया से यहां टूरिस्ट इन महलों को देखने और समझने आते हैं। इन सब के अलावा जयपुर वास्तुकला की शानदार विरासत और जीवंत संस्कृति के लिए मशहूर ऐतिहासिक शहर है।
आइए एक नजर डालते हैं इस शहर के इतिहास पर-
राजस्थान के जयपुर की स्थापना 1727 ईसवी में जयसिंह द्वितीय ने की थी। 17वीं शताब्दी में जब मुगल अपनी ताकत खोने लगे थे और पूरे भारत में अराजकता फैलने लगी थी तब ऐसे दौर में राजपूताना की आमेर रियासत, एक बडी ताकत के रूप में उभरी। महाराजा जयसिंह को तब मीलों के दायरे में फैली अपनी रियासत संभालने और सुचारु राजकाज संचालन के लिए आमेर छोटा लगने लगा था और इस तरह से उन्होंने इस नई राजधानी के रूप में जयपुर की कल्पना की। इस शहर की नींव पहले पहल कहां रखी गई इसपर कई मतभेद हैं। हालांकि, कुछ इतिहासकारों के अनुसार तालकटोरा के निकट स्थित शिकार की होदी से इस शहर के निर्माण की शुरुआत हुई। कुछ इसे ब्रह्मपुरी और कुछ आमेर के पास एक स्थान 'यज्ञयूप' स्थल से मानते हैं।
जयसिंह ने यह शहर बसाने से पहले इसकी सुरक्षा की भी काफी चिंता की थी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ही सात मजबूत दरवाजों के साथ किलाबंदी की गई थी। इतिहास की पुस्तकों में जयपुर के इतिहास के अनुसार यह देश का पहला पूरी योजना से बनाया गया शहर था और स्थापना के समय राजा जयसिंह ने अपनी राजधानी आमेर में बढ़ती आबादी और पानी की समस्या को ध्यान में रखकर ही इसका विकास किया था।
9 खंड़ों में विभाजित है ये शहर-
यह शहर 9 खंडों में विभाजित किया गया था, जिसमें दो खंडों में राजकीय इमारतें और राजमहलों को बसाया गया था।
क्यों कहा जाता है गुलाबी नगरी-
यह शहर शुरुआत से ही 'गुलाबी' नगरी नहीं था बल्कि अन्य सामान्य नगरों की ही तरह था। लेकिन 1876 में जब वेल्स के राजकुमार आए तो महाराजा रामसिंह (द्वितीय) के आदेश से पूरे शहर को गुलाबी रंग से जादुई आकर्षण प्रदान करने की कोशिश की गई थी। उसी के बाद से यह शहर 'गुलाबी नगरी' के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
जयपुर का गौरव हैं ये जगहें-
सुंदर भवनों के आकर्षक स्थापत्य वाले, दो सौ वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल में फैले जयपुर में जलमहल, जंतर-मंतर, आमेर महल, नाहरगढ़ का किला, हवामहल, जयगढ़ का किला, नाहरगढ़ का किला, सिटी पैलेस, अलबर्ट हॉल और आमेर का किला राजपूतों के वास्तुशिल्प के बेजोड़ नमूने हैं।
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