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हम में से शायद ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो अपनी साफ-सफाई के साथ अपने आस-पास का भी ध्यान रखते हैं। इसे एक अच्छी आदत कहा जा सकता है, लेकिन कोई चीज केवल तभी तक सही होती है जब तक वह अपनी हद में रहे। क्योंकि किसी भी चीज की अति हमारे लिए ही खतरनाक साबित होने लगती है। ऐसा ही सफाई का ध्यान रखने वाले लोगों के साथ भी हैं। कई लोग साफ-सफाई को लेकर इतने सतर्क होते हैं कि वह अपने साथ सेनिटाइजर भी रखते हैं। ये लोग किसी भी काम को करने के बाद इसका इस्तेमाल करते हैं।
दरअसल, सेनिटाइजर को लेकर दावा किया जाता है कि यह हमारे 99.9 फीसदी तक कीटाणुओं का खत्म कर देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके लिए खतरनाक होता है। कुछ समय पहले किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया था कि जो लोग नियमित तौर पर हाथ धोने के लिए साबुन से ज्यादा सेनिटाइजर का इस्तेमाल कर रहे हैं वह अन्य लोगों की तुलना में 6 गुणा ज्यादा नोरोवायरस की चपेट में थे। बता दें कि यह तीव्र आंत्रशोथ के ज्यादातर मामलों का कारण बनता है।
गौरतलब है कि, सेनिटाइजर में ट्राइक्लोसान नाम का कैमिकल पाया जाता है। इसी कारण यह जैसे ही हमारी त्वचा पर पड़ता है ये तुरंत सूख भी जाता है। इसका ज्यादा इस्तेमाल करने पर यह हमारे खून में मिलने लगता है। इसके बाद यह हमारी मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है। सेनिटाइजर में मौजूद बेंजाल्कोनिययम और विषैले तत्वों के कारण त्वचा में जलन और खुजली की समस्या होने लगती है।
सेनिटाइजर को खूशबूदार बनाने के लिए इसमें फैथलेट्स नाम का कैमिकल मिलाया जाता है। इसकी मात्रा जितनी ज्यादा होगी यह उतना ही नुकसानदायक साबित होगा। इस कारण यह हमारे लीवर, किडनी और फेंफड़ों के लिए खतरा बन सकता है।
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