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ताजमहल दुनिया का सबसे बड़ा अजूबा है। इसे पूरी दुनिया में प्रेम के प्रतीक के रूप में माना जाता है। जी हाँ, आज आप किसी भी व्यक्ति से पूछो कि दुनिया में प्रेम का सबसे प्रमुख प्रतीक क्या है तो लगभग सभी लोगों का एक ही जवाब होगा- ताजमहल। लेकिन क्या आपने कभी भी इस बात पर विचार किया है कि आख़िर ताजमहल को प्रेम की निशानी कहना कितना और किस तरह से सही होगा, जबकि यह जिस मुमताज की याद में बनवाया गया है शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया था, उसने तो कभी मुमताज की परवाह ही न की थी और न ही मुमताज के मरने के बाद उसे कोई गहरा शोक था।
जी हाँ, आपको बता दें कि शाहजहाँ कामुकता के लिए इतना कुख्यात था, की कई इतिहासकारों ने उसे उसकी अपनी सगी बेटी जहाँआरा के साथ सम्भोग करने का दोषी कहा है। फिलहाल इतिहासकार वी स्मिथ न अपनी क़िताब ‘अकबरः दी ग्रेट मुगल’ में साफ़तौर पर लिखा है कि “शाहजहाँ के हरम में 8000 रखैलें थीं, जो उसे उसके पिता जहाँगीर से विरासत में मिली थी। उसने बाप की सम्पत्ति को और बढ़ाया। उसने हरम की महिलाओं की व्यापक छाँट की तथा बुढ़ियाओं को भगा कर और अन्य हिन्दू परिवारों से बलात लाकर हरम को बढ़ाता ही रहा।”
आपको बता दें कि मुमताज शाहजहाँ की सात बीबियों में चौथी थी। इसका मतलब है कि शाहजहाँ ने मुमताज से पहले 3 शादियाँ कर रखी थी और जब मुमताज से शादी करने के बाद भी उसका मन नहीं भरा तो उसके बाद भी उसने 3 शादियाँ और की। यहाँ तक कि मुमताज के मरने के एक हफ्ते के अन्दर ही उसकी बहन फरजाना से शाहजहाँ ने शादी कर ली थी, जिसे उसने रखैल बना कर रखा हुआ था।
इसके अलावा यह बात भी जानने लायक है कि शाहजहाँ से शादी करते समय मुमताज कोई कुंवारी लड़की नहीं थी, बल्कि वो शादीशुदा थी और उसका पति शाहजहाँ की सेना में सूबेदार था, जिसका नाम शेर अफ़गान ख़ान था। शाहजहाँ ने शेर मुमताज के पति की की हत्या करके ही मुमताज से शादी की थी। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि यह प्रेम है या कुछ और।
मुमताज के प्रति शाहजहाँ का इतना ही प्यार होता तो वह उसे महज 38 वर्ष की अवस्था में सिर्फ़ बच्चा पैदा करते चले जाने के कारण मरने नहीं देता। आपको बता दें कि मुमताज की मौत कोई एक्सीडेंट से नहीं, बल्कि चौदहवें बच्चे को जन्म देने के दौरान अत्यधिक कमजोरी के कारण हुई थी। फिलहाल ताजमहल यदि प्रेम का प्रतीक होता तो उसको बनाने वाले मज़दूरों के हाथ भी नहीं कटवा दिये जाते। ऐसे में ताजमहल को प्रेम का प्रतीक कहना कतई उचित नहीं होता।
Author: Amit Rajpoot
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