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हिंदी सिनेमा में ऐसे कई सारे फिल्ममेकर और अभिनेता हुए हैं, जिन्होने अपनी कला के जरिए सिनेमा को नई उंचाईयों पर पहुंचाया है, इन्ही में से एक नाम गुरू दत्त का है। गुरू दत्त ने प्यासा, कागज के फूल, चौदहवीं का चाँद और साहिब बीबी और ग़ुलाम जैसी कई बेहतरीन फिल्मों को अपने अभिनय से सजाया है। वैसे गुरू दत्त जितने बेहतरीन अभिनेता और फिल्मकार थें, उतने ही संजीदा इंसान भी। जिन्होंने अपनी जिंदगी में बेहद शिद्दत से प्यार किया और उस प्यार के खातिर अपनी जान भी दे दी। आज गुरू दत्त के जन्मदिन के मौके पर हम उनकी जिंदगी के इसी किस्से को आप तक शेयर कर रहे हैं।
गुरू दत्त का जन्म 1925 में आज ही के दिन यानी कि 9 जुलाई को बेंगलुरु के शिवशंकर राव पादुकोण और वसंती पादुकोण के घर में हुआ था। वैसे आपको बता दें कि गुरुदत्त के बचपन का नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था, पर बंगाली संस्कृति के प्रति लगाव के चलते उन्होंने अपना नाम बदलकर गुरुदत्त रख लिया था।
वैसे बात करें गुरू दत्त के काम की तो 50-60 के दशक में उन्होने अपनी फिल्मों के जरिए हिंदी सिनेमा को अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी। प्यासा और काग़ज़ के फूल जैसी क्लासिक फिल्मों को उफस वक्त में टाइम पत्रिका के 100 सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मों की सूचि में शामिल किया गया था। ऐसे में उन्हें मरणोपरांत 2010 में CNN ने एशिया के 25 बेस्ट एक्टर्स की लिस्ट में शामिल किया था।
इस तरह से गुरूदत्त का फिल्मी करियर जितना बेहतरीन था, उनकी पर्सनल लाइफ उतनी ही उलझनो से भरी थी। निजि जिंदगी में प्यार और परिवार के बीच उन्हें काफी कुछ झेलना पड़ा था। दरअसल, गुरू दत्त ने अपने दौर की प्रसिद्ध सिंगर गीता दत्त से शादी की थी।
पर बाद में उनका झुकाव फिल्म एक्ट्रेस वहीदा रहमान की तरफ हो गया था, ऐसे में इस के चलते उनकी पत्नी गीता दत्त से विवाद काफी बढ़ गया। इस गम में वो शराब, सिगरेट और नींद की गोली के आगोश में चले गए थे और आखिर में उन्होने 39 साल की छोटी सी उम्र में खुदकुशी कर ली थी।
Author: Yashodhara Virodai
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