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देश में ऐसे लोगों की संख्या हर रोज़ तेज़ी से बढ़ रही है, जिनको मोबाइल की लत लगती जा रही है। जी हाँ, आपको बता दें कि भारत में मोबाइल प्रयोग करने वालों की संख्या 104 करोड़ तक पहुँच चुकी है। इंटरनेट के विस्तार और स्पेशल साइट के तिलिस्म ने लोगों को मोबाइल का लती बना दिया है। यह एक ऐसा लत है जो व्यक्ति को मदहोश नहीं करता परन्तु यह व्यक्ति की मनोदशा को पूरी तरह से बिगाड़ देता है। हर वक़्त सिर झुकाकर मोबाइल से स्क्रीन से चिपके रहने वाले यानी की मोबाइल के लती लोगों में युवा और बुज़ुर्ग ही नहीं, बल्कि 2 से लेकर 14 साल की आयु वर्ग के बच्चे व किशोर भी शामिल हैं।
दिलचस्प है कि अब ऐसे लोगों के इलाज के लिए अमृतसर में मोबाइल नशा मुक्ति उपचार केन्द्र खोला गया है। जी हाँ, यह मोबाइल के लती लोगों के लिए बहुत बड़ी ख़बर है कि अमृतसर में देश का पहला मोबाइल डी-एडिक्शन ट्रीटमेंट सेंटर ख़ुल गया है। आपको बता दें कि इस मोबाइल नशा मुक्ति उपचार केन्द्र में काउंसलिंग और दवाओं से पीड़ितों का उपचार किया जायेगा।
अमृतसर में इस मोबाइल नशा मुक्ति उपचार केन्द्र के ख़ुल जाना हमें कई तरह के संकेत दे रहा है। ऐसे में इस बात की गंभीरता बढ़ जाती है कि माता-पिता अपने बच्चों का विशेष ध्यान दें। इसके लिए ध्यान रखें कि आप अपने बच्चों को मोबाइल न दें। अगर मज़बूरी में कुछ समय के लिए मोबाइल देना ही पड़े तो ऐसे गेम्स वगैरह डिलीट कर दें, जिससे बच्चों के व्यवहार में आक्रमामकता आती है।
Author: Amit Rajpoot
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