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इंडियन सिनेमा दुनिया की सबसे समृद्ध फिल्म इंडस्ट्री मानी जाती है, जिसका अपना बाजार है और इस बाजार में समय और परिस्थितियां अनुसार तरह-तरह के उत्पाद सामने आते हैं। जैसा कि इस वक्त बॉलीवुड में बायोपिक बनाने के चलन बढ़ चुका है। स्पोर्ट्स पर्सन से लेकर पॉलिटीशियन और देश के उस हर चर्चित व्यक्ति पर फिल्म बन रही है, जो कि किसी ना किसी वजह से सुर्खियों में रहा हो। जैसे कि इस शुक्रवार ऋतिक रोशन की मोस्ट अवटेड फिल्म सुपर 30 रिलीज हो रही है, जो कि बिहार के मशहूर मैथमेटिशियन आनंद कुमार की ऑफिशियल बायोपिक है। इसके बाद कपिल देव, साइना नेहवाल जैसे स्टार खिलाड़ियों के अलावा भी कई बड़ी हस्तियों की बायोपिक लाइन में है।
ऐसे में ये समझना जरूरी है कि आखिर बॉलीवुड में बायोपिक का चलन अचानक से क्यों बढ़ गया है, वो भी उस इंडियन सिनेमा में जहां फिल्मों के जरिए हमेशा से फैमिली और इमोशनल ड्रामा परोसा गया है। आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं कि आखिर ये बायोपिक की बाढ़ बॉलीवुड में क्यों और कैसे आई है।
फिल्मों में चढ़ा रियलटी का रंग
जी हां, जिस तरह से आज से 10-15 साल पहले टीवी इंडस्ट्री में रियलटी का चलन बढ़ा था, वैसे ही अब फिल्मों में भी रियलटी का रंग चढ़ चुका है। आज लोगों को ड्रामा या फिक्शन से कहीं अच्छी रियल स्टोरी लगती है। पिछले कुछ सालों का बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड देख ले तो मैरी कॉम से लेकर एम एस धोनी और संजू तक इसके उदाहरण हैं। जाहिर दर्शकों को बायोपिक पसंद आ रही है। ऐसे में बॉलीवुड भी अब इसी को परोसने लगा है।
हिट और आसान फॉर्मूला
वहीं बायोपिक के जरिए फिल्ममेकर्स को फिल्मों का हिट और आसान फॉर्मूला मिल गया है। इसके लिए आपको अलग से ना तो कोई स्टोरी ढूढ़नी है और ना ही आपको इसके लिए उतना माहौल बनाना होगा। क्योंकि जो शख्सियत सुर्खियों में है उसे तो लोग जानना ही चाहेंगे। आपको एक व्यक्ति की कहानी को रचनात्मक तरीके से सिर्फ पेश करना है और आज के समय में ज्यादातर फिल्ममेकर यही कर रहे हैं।
बनी बनाई फैन फालोइंग का फायदा
जी हां, बायोपिक का एक फायदा ये भी है कि आपको इसके जरिए एक बनी बनाई फैन फालोइंग मिल जाती है। जैसे कि अगर एम एस धोनी की बायोपिक आती है तो इसे देखने के लिए एक दर्शको की एक बड़ी तादाद पहले से ही तैयार बैठी होती है, जो कि धोनी के फैंस होते हैं। वैसे ही जब आप आनंद कुमार की बायोपिक लाते हैं तो आनंद कुमार के बारे में जितने लोग भी जानते हैं, वो और इंजीनियरिंग के छात्रों का बड़ा समुदाय इसे देखने के लिए तैयार बैठा है। जाहिर है इसका फायदा फिल्म को तो मिलेगा ही।
Author: Yashodhara Virodai
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