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टुन टुन का जन्म 11 जुलाई, 1923 को उत्तर प्रदेश के अमहोरा ज़िले में एक छोटे से गाँव में हुआ था और आज इनका 96वाँ जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। ये भारतीय फ़िल्म जगत में एक बेहतरीन पार्श्व गायिका और अभिनेत्री के तौर पर अपने हुनर को बिखेर रही थीं और फिर धीरे-धीरे ये बॉलीवुड की कालजयी हास्य कलाकार बनकर उभरीं। दिलचस्प है कि टुन टुन को बॉलीवुड की पहली कॉमेडियन होने का भी गौरव प्राप्त है। ये बात भी जानने लायक है कि टुन टुन का असली नाम उमा देवी खत्री था।
ये बात समझने लायक है कि समाज में वे लोग जो दूसरों की ज़िन्दगी में मिसरी घोलते हैं और लोगों के होठों पर मुस्कान लाने का काम करते हैं, उनकी अपनी निजी ज़िन्दगी इतनी गुलज़ार नहीं होती, बल्कि कई बार तो उनका निजी जीवन संघर्षों और दुःखों के पहाड़ों तले होता है। ऐसी ही शख़्सियत टुन टुन भी तीं। जी हाँ, आपको बता दें कि इनके गाँव में जमीन के मामूली से विवाद के लिए इनके माता-पिता और भाई की हत्या कर दी गई थी। जब ये घटना हुयी तो टुन टुन महज दो से ढाई बरस की ही रही होंगी। इस बारे में वो ख़ुद एक साक्षात्कार में बताती हैं कि “मुझे याद नहीं है कि मेरे माता-पिता कौन थे और वे कैसे दिखते थे।”
आपको बता दें कि हुनरमंद टुन टुन जब 23 बरस की हुयीं तो ग़ुरबत और मुफ़लिसी के मारे वह घर छोड़कर भाग खड़ी हुयीं और मुम्बई आकर जाने-माने म्यूज़िक कंपोज़र नौशाद अली का दरवाज़ा खटखटाया। टुन टुन ने तब नौशाद अली से कहा कि वह अच्छा गा सकती है और उसे एक मौक़े की तलाश है, यदि आपने बात नहीं समझी तो वह समुद्र में डूबकर अपनी जान दे देगी। इस तरह से टुन टुन ने नाज़िर की साल 1946 में आयी फ़िल्म ‘वामिक अज़रा’ से बतौर एकल पार्श्व गायिका के रूप में अपनी फ़िल्मी शुरुआत की।
Author: Amit Rajpoot
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