Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
आज पूरे देश में वर्ल्ड पॉप्युलेशन डे मनाया जा रहा है। ये दिन हर साल 11 जुलाई को मनाया जाता है, ताकि लोगों को तेजी से बढ़ती आबादी के प्रति जागरूक किया जाए। इस दिन की शुरुआत साल 1987 में हुई थी, बताया जाता है कि इस दिन पहली बार दुनिया की जनसंख्या बढ़कर 5 अरब के पार पहुंची थी। इसी के बाद संयुक्त राष्ट्र ने जनसंख्या को नियंत्रित करने का फैसला लिया और जनसंख्या वृद्धि को लेकर दुनियाभर में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से इस दिन को ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ घोषित किया। तब से हर साल 11 जुलाई की तारीख को पूरी दुनिया में बढ़ती जनसंख्या को कैसे कंट्रोल करें, इसपर जागरूकता फैलाने का काम किया जाता है।
जैसे कि सभी जानते हैं चीन के बाद भारत सबसे ज्य़ादा आबादी वाला देश है। भारत में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कभी सरकार ने ‘हम दो हमारे दो’ का नारा दिया, तो कभी महिलाओं के लिए मुफ्त ‘कॉपर-टी’ जैसे उपाये निकाले। परिवार नियोजन के लिए सरकार द्वारा चलाए गए ज्यादातर मेडिकल कार्यक्रमों को महिलाओं के लिए ही आयोजित किया जाता है। क्योंकि हमारे समाज और खासकर पुरुषों का मानना है कि परिवार नियोजन और नसबंदी करवाना केवल महिलाओं की जिम्मेदारी है।
लेकिन देखा जाए तो ये ‘नसबंदी’ महिलाओं के हिस्से का एक और अतिरिक्त दर्द है, जिसको न चाहकर भी उन्हें सहना पड़ता है।
लेकिन, हर कोई जानता है कि ये एक ऐसा दर्द है जिसे बांटा जा सकता है... क्योंकि गर्भधारण सिर्फ अकेले महिला नहीं कर सकती इसमें पुरुष की भी उतनी ही हिस्सेदारी होती है जितनी महिला की। ऐसे में परिवार नियोजन का जिम्मा पुरुषों का भी है। ये ऐसा दर्द है, जिसे पुरुष महिलाओं से बांट सकते हैं।
अगर पुरुष चाहें, तो वह अपनी पत्नी की नहीं बल्कि खुद की नसबंदी करवा सकते हैं। नसबंदी एक खास तरह का ऑपरेशन होता है, जिसमें पुरुषों की शुक्रवाहिका या वास डिफरेन्स नाम की 2 ट्यूब को काट दिया जाता है। नसबंदी के बाद शुक्राणु वीर्य तक पहुंच नहीं पाते, जिसके परिणामस्वरूप गर्भधारण का सवाल ही नहीं उठेगा।
पुरुष क्यों नसबंदी से बचते हैं?
डर- दर्द का डर उन्हें इस चीज से दूर भगाता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि महिलाओं के ऑपरेशन की तुलना में पुरुषों की नसबंदी में दर्द नहीं होता। पुरुष नसबंदी करवाकर तुरंत घर लौट सकते हैं। नसबंदी के ऑपरेशन में एनेस्थीसिया का इंग्जेक्शन लगा दिया जाता है, जिससे नाममात्र का ही दर्द होता है।
वहीं पुरुषों की नसबंदी महिलाओं के ऑपरेशन की तुलना में बेहद ही कम खर्चीली होती है।
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop एप, वो भी फ़्री में और कमाएं ढेरों कैश वो भी आसानी से
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.