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चन्द्रमा की ओर बढ़ते क़दम बीती रात अचानक को ज़रा थम गये। ऐसा इसलिए हुआ था, क्योंकि लॉन्च विहैकल में कुछ तकनीकी ख़राबी आ गयी थी। आपको बता दें कि सोमवार की सुबह दो बजकर 51 मिनट पर श्रीहरिकोटा से चन्द्रयान मिशन- 2 का प्रक्षेपण होना था और इसकी पूरी तैयारी भी पूरी हो चुकी थी, कि अचानक से लॉन्चिंग से ठीक 56 मिनट, 24 सेकण्ड पहले इसकी उल्टी गिनती को रोक दिया गया। इसके बाद अब चन्द्रयान मिशन- 2 के प्रक्षेपण की नई तारीख़ का ऐलान बहुत जल्द किया जायेगा। फिलहाल इस मौक़े पर आइए जानते हैं कि हमने अब तक चन्द्रमा को लेकर क्या-क्या हासिल कर लिया है।
पहला चन्द्रयान मिशनः
साल 1999 में भारत विज्ञान अकादमी की बैठक में इसका प्रस्ताव रखा गया और फिर इसरो ने राष्ट्रीय चन्द्र मिशन टास्क फोर्स का गठन किया। मिशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इसरो के पास चंद्रयान को सपल करने की क्षमता है।
11 उपकरणों के साथ रवानगीः
चन्द्रयान मिशन- 1 अपने साथ कुल 11 उपकरण चन्द्रमा पर ले गया था।
संभावित आवास की गुफ़ाओं की खोजः
चन्द्रयान मिशन- 1 चन्द्रमा की सतह के नीचे लावे से बनी दो गुफाएँ खोजी, जिन्हें लावा ट्यूब कहा गया।
चन्द्रमा पर धातु की खोजः
चन्द्रमा पर लोहा होने की पुष्टि चन्द्रयान मिशन- 1 के ज़रिए ही हुयी थी। चन्द्रमा के प्राचीन पूर्वी घाटी क्षेत्र में लोहे की प्रचुरता पायी गयी है।
मिलीं 70 हज़ार तस्वीरेः
चन्द्रयान मिशन- 1 में यान ने चन्द्रमा की 3,000 परिक्रमाएँ की। इस दौरान कुल 70,000 तस्वीरें ली गयी थीं, जिनमें चन्द्रमा से पृथ्वी की ली गयी तस्वीर भी शामिल थी।
पिघला हुआ चन्द्रमाः
एम3 ने कभी चन्द्रमा पर लावे का समुद्र होने की थ्योरी को भी साबित किया था। चन्द्रमा पर मौजूद लौह व मैग्नीशियम की मौजूदगी से भी इसकी पुष्टि हो चुकी है।
Author: Amit Rajpoot
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