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अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है, पहले ही दिन इसमें सात हजार से अधिक श्रद्धालुओं भोलेनाथ के दर्शन किये। कश्मीर घाटी के लिए दो हजार से अधिक श्रद्धालुओं का पहला दल रवाना होने के बाद करीब साढ़े चार हजार श्रद्धालुओं का दूसरा दल जम्मू से निकला। इस बारे में एक अधिकारी ने कहा कि श्रीनगर से जम्मू तक किसी को भी यातायात की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक कि श्रद्धालुओं का काफिला जवाहर सुरंग को पार नहीं कर देता।
अमरनाथ यात्रियों के किसी भी गाड़ी को खतरनाक रास्तों की तरफ से नहीं ले जाया जाएगा। उत्तरी कश्मीर के गांदरबल के बालटाल आधार शिविर से यात्रियों ने सोमवार को यात्रा के लिए प्रस्थान किया। शेष पहलगाम मार्ग से यात्रा करते हुए तीर्थस्थल तक पहुंचे। समुद्र तल से 3,888 मीटर ऊपर स्थित हिमालय गुफा श्राइन की 45 दिवसीय वार्षिक यात्रा श्रावण पूर्णिमा उत्सव के साथ 15 अगस्त को समाप्त होगी।
भक्तों के अनुसार मंदिर में बर्फ की एक विशाल संरचना है जो भगवान शिव की पौराणिक शक्तियों का प्रतीक है। बालटाल से 14 किलोमीटर की ऊंची ट्रैक का उपयोग करने से तीर्थयात्रियों को गुफा के अंदर दर्शन करने की अनुमति मिलती है और वे उसी दिन बेस कैंप लौट जाते हैं। बालटाल से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हेलिकॉप्टर सेवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें से 1,617 तीर्थयात्री बालटाल बेस कैंप और 2,800 पहलगाम में पहुंचेंगे।
अधिकारियों ने इस रास्ते पर किसी भी यातायात की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है ताकि यात्रियों के लिए सुगम मार्ग सुनिश्चित किया जा सके। जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल सत्य पाल मलिक, जो श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं, इस मंदिर में विशेष पूजा में भाग लेंगे जो परंपरागत रूप से 'छारी मुबारक' के आगमन के साथ शुरू होता है।
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