Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
हिम्मताराम ने ऐसे-ऐसे कारनामें कर डाले हैं कि उसे वनलाइन डिस्क्राइब कर पाना मुश्किल भरा काम है। जी हाँ, समझ में नहीं आ रहा है कि नके किस काम को लेकर चर्चा शुरू की जाये और किस दिशा से होते हुये कहाँ ख़त्म की जाये। फिर भी आपको बताए देते हैं कि हिम्मताराम भांबू राजस्थान के नागौर ज़िले के रहने वाले हैं। मालूम हो कि ज़िला नागौर पानी के लिहाज़ से एक डार्क ज़ोन माना जाता है। लेकिन हिम्मताराम इस डार्क ज़ोन से घबराने की बजाय न सिर्फ़ नागौर बल्कि ऐसे ही पानी की किल्लत वले ज़िले जैसे बाड़मेर, जैसलमेर तथा बीकानेर समेत कई जगहों पर लाखों पेड़ लगा डाले और मरु भूमि को बदलकर रख दिया।
जी हाँ, दिलचस्प है कि हिम्मताराम ने अब तक कुल 3 लाख, 10 हजार से भी अधिक पौधे लगाने में कामयाबी हासिल की। इनमें से 80 से 90 प्रतिशत पौधे बड़े होकर पेड़ बन चुके हैं। इसके अलावा, हिम्मताराम ने एक सूखाग्रस्त गाँव हरिमा में 1999 में कर्ज लेकर 34 बीघा जमीन खरीदी और उसमें खेती करने के साथ-साथ 16 हजार से भी ज्यादा पेड़ लगा दिए। आज यह गाँव अपने नाम के अनुरूप ही ‛हरी-माँ’ मतलब हरी-भरी धरती माँ की तरह बन गया है।
इस प्रकार, आज जहाँ, पश्चिमी सभ्यता की अंधी दौड़ में हमारे किसान पिसते जा रहे हैं, धरती की कोख से पानी खींचने की मशीनें तैयार कर धरती का बूंद-बूंद पानी चूस रहे हैं। लेकिन ऊपर आसमान से पानी बरसाने वाली मशीनें उनके पास नहीं हैं, जबकि इस काम को तो पेड़ ही बखूबी अंजाम देते हैं। इस बात को हिम्मताराम जैसे लोग ही समझकर आगे बढ़ाते हैं। यक़ीनन वे देश के तमाम किसानों सहित सभी के लिए एक जीती-जीगती मिसाल हैं और प्रेरणा के स्रोत हैं।
Author: Amit Rajpoot
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop App, वो भी फ़्री में और कमाएँ ढेरों कैश आसानी से!
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.