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दुनिया का कचरा भारत में ही उड़ेल दिया गया है। यह प्रायोजित और सुनियोजित है। जी हाँ, आपको बता दें कि भारत में 25 से ज़्यादा देशों का क़रीब 1.2 लाख मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा खपाया गया है। इस पूरे के पूरे कचरे को रिसाइकिल यानी कि दोबारा इस्तेमाल करने के लायक बनाने वाली कंपनियों ने आयात किया था। आपको बता दें कि गैर सरकारी संगठन पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति मंच ने अपनी एक रिपोर्ट में यह चिंता ज़ाहिर की है।
गैर सरकारी संगठन पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति मंच ने अपनी इस चिंता में यह ज़ाहिर किया है कि प्लास्टिक का कचरा जिस मात्रा में उपस्थित हो रहा है, यदि ऐसे ही चलता रहा तो हम प्रदूषण पैदा करने वाली फ़ैक्ट्री बनते चले जाएँगे। इस रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरणविदों का कहना है कि कंपनियों के इस क़दम से प्लास्टिक प्रदूषण घटाने की पहल को बड़ा झटका लग सकता है।
दुर्भाग्य की बात है कि कंपनियाँ चोरी छिपे प्लास्टिक कचरे का आयात कर रही हैं। ऐसे में सरकार को ऐसे ज़िम्मेदार कंपनियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्यवाई करनी चाहिए। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत के 1.2 लाख मीट्रिक टन कचरे में 55 हज़ार मीट्रिक टन कचरा तो सिर्फ़ पाकिस्तान और बांग्लादेश का है। इसके अलावा भारत में मध्य पूर्व, यूरोप और अमेरिका समेत 25 से ज़्यादा देशों में कचरे का आयात किया जा रहा।
Author: Amit Rajpoot
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