Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
नारायण कृष्णन तमिलनाडु के मुदरई के रहने वाले हैं। भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण के सम्मान से नवाजा है। इसका कारण है उनका त्याग और उपेक्षितों के प्रति उनकी संवेदना जिसके कारण वह समाज के रियल हीरो कहलाये। आपको बता दें कि पढ़ाई के बाद नारायण कृष्णन बंगलुरू के एक फ़ाइव स्टार होटल में बतौर शेफ़ अपने करियर की शुरुआत की थी। लेकिन हाथों में पाक-कला का हुनर लिये हुये नारायण कृष्णन के हौसलों को अबी और भी उड़ाव चाहिए था, लिहाजा उन्होंने स्विटज़रलैंड में नौकरी का मन बनाया और आवेदन दिया। स्विटज़रलैंड में नारायण कृष्णन की नौकरी लग गयी और अब इन्हें स्विटज़रलैंड के एक पाँच सितारा होटल में काम करने का प्रस्ताव मिला।
स्विटज़रलैंड जाने से पहले नारायण कृष्णन अपने माता-पिता से मिलने मुदरई गये। वहाँ रहते हुए इनकी नज़र एकदिन सड़क किनारे कुछ विक्षिप्त और बेसहारा लोगों पर पड़ी। इन लोगों को देखकर नारायण कृष्णन इतने द्रवित हुए कि इन्होंने फ़ैसला किया कि वह अब स्विटज़रलैंड नहीं जाएँगे। जी हाँ, नारायण कृष्णन अपने इस फ़ैसले पर अटल रहे और अपने माँ-बाप को जब उन्होंने इसके बारे में बताया तो उनकी माँ नारायण कृष्णन के इस फ़ैसले से ख़ासा नाराज़ हुयीं, उनके पिता तो नारायण कृष्णन पर क़ायदे से ही बिफ़र पड़े।
लेकिन चूँकि नारायण कृष्णन का इरादा एकदम पक्का था, लिहाजा उन्होंने अपनी जमा पूंजी से ही उन बेसहारा और भूखे लोगों को भोजन कराने लगा। धीरे-धीरे नारायण कृष्णन की जमा पूँजी इस नेक काम में समाप्त हो गयी तो उनके इस काम को देखकर दूसरे लोगों ने उनकी मदद करने का मन बनाया।
इस क्रम में एक दिन नारायण कृष्णन के पिता के बॉस ने ही उनके पिता के हाथों उन्हें कुछ रुपयों का चेक भेजा, जिस पाकर नारायण कृष्णन के पिता ख़ुशी से फूले नहीं समा रहे थे और बेटे पर उन्हें गर्व का एहसास हो रहा था।
Author: Amit Rajpoot
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop App, वो भी फ़्री में और कमाएँ ढेरों कैश आसानी से!
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.