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अनुराधा कोइराला का जन्म नेपाल के ओखलढूंगा ज़िले के रामजतार में हुआ था। लेकिन इनकी पढ़ाई-लिखाई भारत में पश्चिम बंगाल के कलिम्पोंग में स्थित सेंट जोसेफ़ कॉन्वेंट स्कूल से हुई। वहाँ की ही शिक्षिकाओं से इन्हें सामाजिक कार्य करने की प्रेरणा मिली थी। इस क्रम में अनुराधा कोइराला ने सबसे पहले 20 साल से अधिक समय तक काठमांडू के आसपास विभिन्न स्कूलों में बच्चों को पढ़ाया। इसके बाद इसके बाद साल 1993 में उन्होंने नेपाल में 'मैती नेपाल' की स्थापना की। यह संस्था तस्करी से लड़कियों को बचाने के लिए काम करती है और साथ ही कोठे से लड़कियों को बचाकर उनका पुनर्वास करने या सुरक्षित स्थान देती है।
ग़ौरतलब है कि अनुराधा कोइराला ने अपनी इस संस्था में काम करते हुए कई सारी लड़कियों को ट्रैफिकिंग से बचाया है। वह भारत-नेपाल के बॉर्डर पर किसी गार्ड की तरह काम करती हैं यानी कि बॉर्डर पार करने वाली पीड़ित लड़कियों की पहचान करके उन्हें बचाती हैं। बॉर्डर पर कबूतरबाजी यानी कि मानव तस्करी बहुत बढ़ रही है। ऐसे में, ये संस्था इन्हें रेस्क्यू करती हैं और हर दिन औसतन चार लड़कियों को तस्करी से बचाती हैं।
अनुराधा कोइराला को अपने इस काम के लिए कई अवार्ड्स से सम्मानित भी किया है। अमेरिका में उन्हें 2010 में 'सीएनएन हीरो अवार्ड' और साथ में 60 लाख रुपए से ज्यादा की मदद दी गई। उन्हें जर्मनी का UNIFEM पुरस्तार 2007, मदर टेरेसा अवार्ड्स, और शौर्य की चेतना सम्मान 2006 जैसे कई पुरस्कार मिल चुके हैं। भारत सरकार ने उनके इस महान कृत्य के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया है।
Author: Amit Rajpoot
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