Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
राजाराम त्रिपाठी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ ज़िले के रहने वाले हैं, लेकिनये अभी छत्तीसगढ़ में रहते हैं। दिलचस्प है कि राजाराम त्रिपाठी के दादा जी बहुत समय पहले कृषि में नवाचार के लिए बस्तर बुलाए गये थे, जिसके बाद से राजाराम त्रिपाठी का परिवार छत्तीसगढ़ में ही बस गया। राजाराम त्रिपाठी का मन बचपन से ही खेती में रमता था, लेकिन इनके घर वालों ने इन्हें पढ़ा-लिखाकर बैंक ऑफ़ इंडिया में प्रोबेशनरी अधिकारी बना दिया। हालाँकि राजाराम त्रिपाठी का मन नौकरी में लगा नहीं और इन्होंने नौकरी से इस्तीफ़ा दे दिया। इस बात से इनके घर वाले राजाराम त्रिपाठी से ख़ासा नाराज़ थे। लेकिन राजाराम त्रिपाठी ने खेती करना शुरू कर दिया।
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के कोंडागाँव जिले के चिकिलकुट्टी गाँव में कई सौ एकड़ में डॉ. राजाराम त्रिपाठी 25 से अधिक वनौषधियों की खेती करते हैं। शुरूआत में राजाराम त्रिपाठी ने 25 एकड़ में सफेद मूसली की खेती की। इससे उनको काफी मुनाफा हुआ, उसके बाद उन्होंने अपनी खेती का दायरा बढ़ाया और ज्यादा कृषि भूमि पर सफेद मूसली के अलावा स्टीविया, अश्वगंधा, लेमन ग्रास, कालिहारी और सर्पगंधा जैसी जड़ी-बूटियों की भी खेती शुरू कर दी।
अब खेती में पैदावार तो हो रही थी, लेकिन इसमें राजाराम त्रिपाठी को अब मार्केटिंग की परेशानी होती थी, इसलिए इस समस्या से निबटने के लिए उन्होंने किसानों का एक संगठन बनाया है। इसके बाद उन्होंने माँ दंतेश्वरी हर्बल प्रोडक्ट्स लिमिटेड के नाम से एक कंपनी भी बनायी है। इस कंपनी से कंपनी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के 350 परिवारों के 22 हजार लोगों को रोजगार मिला है। माँ दंतेश्वरी हर्बल ग्रुप आदिवासी क्षेत्रों के मुश्किल हालात में काम करते हुए कई तरह के हर्बल फूड सप्लीमेंट का उत्पादन और मार्केटिंग सेंट्रल हर्बल एग्रो मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की मदद से करता है।
Author: Amit Rajpoot
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop App, वो भी फ़्री में और कमाएँ ढेरों कैश आसानी से!
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.