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मुल्ला नसरुद्दीन खजूर खाने के लिए एक दिन बगदाद की गलियों से गुजर रहे थे। उस दिन वे बाजार में उतरे और कुछ खजूर खरीदे। फिर बारी आयी दुकानदार को मुद्राएं देने की, तो मुल्ला नसरुद्दीन अपने पायजामे की जेब में टटोलने लगे, लेकिन मुद्राएं वहां नहीं थी। फिर उन्होंने अपने जूते निकाले और जमीन पर बैठ गए। मुल्ला नसरुद्दीन ज़मीन पर बैठकर जूतों को चारों ओर से टटोलने लगे, परंतु मुद्राएं जूतों में भी नहीं थी। अब तक वहां काफी भीड़ एकत्रित हो गई थी। एक तो मुल्ला नसरुद्दीन की गधे की सवारी ही भीड़ इकट्ठी करने को पर्याप्त थी और अब ऊपर से उनकी चल रही यह हरकत भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती जा रही थीं।
देखते ही देखते पचास के करीब लोग मुल्ला नसरुद्दीन के आस-पास एकत्रित हो गए थे। यानी कि माजरा जम चुका था। इधर मुल्ला नसरुद्दीन एक तरफ मुद्राएं ढूंढ़ रहे थे और दूसरी तरफ खरीदे हुए खजूर भी खाए जा रहे थे। निश्चित ही दुकानदार इस बात से थोड़ा टेंशन में आ गया था। एक तो ये व्यक्ति ऊट-पटांग जगह मुद्राएं ढूंढ़ रहा है,और ऊपर से खजूर भी खाए जा रहा है। कहीं मुद्राएं न मिलीं तो क्या इसके पेट से खजूर निकालकर पैसे वसूलूंगा?
अभी दुकानदार यह सब सोच ही रहा था कि मुल्ला नसरुद्दीन ने अपने सर से टोपी उतारी और उसमें मुद्राएं खोजने लगे। अबकी बार दुकानदार से बिल्कुल भी नहीं रहा गया और उसने सीधा मुल्ला नसरुद्दीन से कहा- यह मुद्राएं यहां-वहां क्या खोज रहे हो? सीधे-सीधे कुर्ते की जेब में क्यों नहीं देखते हो? इस पर मुल्ला नसरुद्दीन बोले- लो! यह तुमने पहले क्यों नहीं सुझाया? इतना कहते-कहते उन्होंने कुर्ते की जेब में हाथ‌ डाला और मुद्राएं दुकानदार को थमाते हुए बोले- वहां तो थीं हीं। ये तो मैं ऐसे ही चांस ले रहा था। यह सुनते ही पूरी भीड़ हंस पड़ी। भीड़ में से कोई एक बुजुर्ग बोला- भाई! ये तो कोई‌ पागल लगता है। जब मालूम है कि मुद्राएं कुर्ते की जेब में हैं, तब भी यहां-वहां ढूंढ़ रहा था।
अब मुल्ला नसरुद्दीन की बारी आ गई थी। जो बात कहने हेतु उन्होंने इतना सारा नाटक किया था। उन्होंने बड़ी ही गंभीरता पूर्वक सबको संबोधित करते हुए कहा कि मैं शायद इसलिए पागल घोषित कर दिया गया हूँ, क्योंकि जो मुद्राएं जहां रखी हैं वहां नहीं खोज रहा हूं इसीलिए। लेकिन तुम सब तो ये पागलपन हमेशा से करते आये हो। वाह रे दुनिया वालों! थोड़ा अपने गिरेबाँ में झांको। यह जानते हुए भी कि रब दिल में बसा हुआ है, तुम लोग उसे इधर-उधर और मंदिरों-मस्जिदों में खोजते फिर रहे हो। यदि मैं पागल हूं तब तो तुम लोग महा-पागल हो। क्योंकि मैं तो मामूली सी बात पर यह मूर्खता कर रहा था, पर तुम लोग तो विश्व के सबसे अहम सत्य के मामले में यह मूर्खता कर रहे हो।
Author: Amit Rajpoot
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