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अब ज़माना वह नहीं रहा जब आपको कुछ बड़ा करने के लिए कोई बहुत बड़ा पहाड़ तोड़ने की ज़रूरत होती है। अब ज़माना ऐसा है कि आप छोटे से छोटा काम भी यदि पूरी शिद्दत से कर जाओ तो दुनिया आपको सलाम ठोकने के लिए बैठी है। जी हाँ, आपको बता दें कि सूचना के इस मज़बूत और व्यापक तंत्र में आपके किये हुये हर छोटे बड़े का हिसाब रहता है, इसलिए आप कहीं से भी समाज के लिए प्रेरमादायी कार्य कर सकते हैं और बिहार की वंदना झा इसका बहुत बड़ा उदाहरण हैं। वंदना बिहार के भागलपुर ज़िले के के चंपानगर की रहने वाली 41 वर्षीय महिला हैं।
आपको बता दें कि इस बात को साबित कर बैठी हैं कि यदि आपके हाथों में हुनर हो ति आप दुनिया को अपने उसी हाथ की मुट्ठी में समेट सकती हैं। कम से कम वंदना ने तो कुछ ऐसा ही किया है। दिलचस्प है कि वंदना झा ने अपने हाथों में क़ैद सिलाई करने के हुनर को जगाया और फिर इसे ऐसा जगाया कि वह सिलाई मशीन से अपने साथ अनेक महिलाओं की क़िस्मत संवारने लगीं। जी हाँ, वंदना अपनी मुस्लिम महिला मित्रों या सहयोगियों नगमा खानम और सोनी खानम के साथ मिलकर अब तक सैकड़ों महिलाओं और लड़कियों को सिलाई की इस कला में हुनरमंद बना चुकी हैं, जिसके बाद ये महिलाएं न केवल अब आर्थिक रूप से सबल हुई हैं, बल्कि कई तो दूसरी महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध करा रही हैं।
अपने इस काम से बल लेते हुये वंदना झा ने 'मदद फाउंडेशन' के नाम की संस्था प्रारंभ की और महिला सशक्तीकरण के अभियान प्रारंभ कर महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का बीड़ा उठाया है। आज वंदना इस क्षेत्र के लोगों तक यह संदेश पहुंचाने में कामयाब हुई हैं कि महिलाएं स्वयं अपनी चेतना से प्रेरित होकर न केवल घर का, बल्कि समाज का भी भला कर सकती हैं। बता दें कि अब तक उन्होंने 1500 से ज्यादा महिलाओं और लड़कियों को नि:शुल्क सिलाई, बुनाई और ब्यूटिशियन का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। वर्तमान समय में वंदना लगभग 70-75 महिलाओं के समूह को निःशुल्क सिलाई का प्रशिक्षण दे रही हैं।
Author: Amit Rajpoot
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