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सावन के पवित्र महीने में रूद्राक्ष को धारण करना विशेष फल देने वाला होता है। ऐसा माना जाता ह कि रूद्राक्ष हर तरह की नुकसानदेह ऊर्जा से हमें बचाता है। आपको बता दें कि यह सिर्फ़ योगी तपस्वियों के लिए नहीं है, बल्कि सांसारिक और ग्रहस्थ लोगों के लिए भी है। मालूम हो प्रत्येक मनुष्य मात्र के लिए रूद्राक्ष इसलिए भी आवश्यक है, क्योंकि यह जीवन में नकारात्मकता कम करता है। इसकी वजह यह है कि इसमें एक विलक्षण स्पन्दन होता है, जो व्यक्ति में ऊर्जा का एक सुरक्षा कवच बना देता है और फिर इससे बाहरी नकारात्मक ऊर्जाएँ इंसान को परेशान नहीं कर पाती हैं।
आपको बता दे कि यह अधिकतर लोग जानते होंगे कि रूद्राक्ष एक ख़ास तरह के पेड़ का बीज है। इसका उपयोग आध्यात्मिक क्षेत्र में किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि रूद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव की आँखों के अश्रु बिन्दु से हुयी है। इस प्रकार, रूद्र अश्रु यानी की रूद्राक्ष अनिष्ट का रक्षा कवच होता है। ये बात भी ग़ौर करने लायक है कि रूद्राक्ष भगवान शिव का वरदान है जो संसार के भौतिक दुःखों को दूर करने के लिए शिव ने प्रकट किया है।
मालूम हो कि रूद्राक्ष भारत में एक ख़ास क़िस्म की ऊँचाई पर हिमालय के पहाड़ी क्षेत्रों और कुछ अन्य जगहों पर भी पाये जाते हैं। हालाँकि ये बहुत ही अफ़सोस की बात है कि आज देश में रूद्राक्ष के बहुत ही कम पेड़ बचे रह गये हैं। इसलिए अब हमारे देश में जो रूद्राक्ष आता है वह नेपाल, म्यांमार, थाईलैंड और इंडोनेशिया से मँगाए जाते हैं।
Author: Amit Rajpoot
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