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अटल बिहारी वाजपेयी भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री थे, जिनका निर्वाण बीते बरस आज ही के दिन 16 अगस्त, 2018 को दिल्ली के एम्स अस्पताल में शाम पाँच बजे हुआ था और इस तरह अटल बिहारी वाजपेयी की आज पहली पुण्यतिथि है। आपको बता दें कि जब देश की इस महान नेतृत्व-पुरुष का निर्वाण हुआ था तो ये 93 साल के थे। ग़ौरतलब है कि दिसम्बर, 2005 से सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने वाले अटल बिहारी वाजपेयी को साल 2009 में पहली बार दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद से उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता ही चला गया।
इस बीच उन्हें बीच में कई बार अस्पताल का मुँह देखना पड़ा था और अंत में आख़िरी बार उन्हें 11 जून, 2018 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी कि एम्स में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद से वो लगातार बीमार ही रहे रहे और अंततः वो इस संसार को बिदा कह गये।
वाजपेयी अपने पूरे जीवन अविवाहित रहे। उन्होंने लंबे समय से दोस्त राजकुमारी कौल और बी॰एन॰ कौल की बेटी नमिता भट्टाचार्य को उन्होंने दत्तक पुत्री के रूप में स्वीकार किया। राजकुमारी कौल की मृत्यु वर्ष 2014 में हो चुकी है। अटल जी के साथ नमिता और उनके पति रंजन भट्टाचार्य रहते थे। ये बात ग़ौर करने लायक है कि मांस और अल्कोहल को छोड़ने वाले शुद्धवादी ब्राह्मणों के विपरीत, वाजपेयी को व्हिस्की और मांस का शौकीन माना जाता था।
आपको बता दे कि अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी में लिखते हुए एक प्रसिद्ध कवि थे। उनके प्रकाशित कार्यों में कैदी कविराई कुंडलियां शामिल हैं, जो 1975-77 आपातकाल के दौरान कैद किए गए कविताओं का संग्रह था, और अमर आग है। अपनी कविता के संबंध में उन्होंने लिखा, "मेरी कविता युद्ध की घोषणा है, हारने के लिए एक निर्वासन नहीं है। यह हारने वाले सैनिक की निराशा की ड्रमबीट नहीं है, लेकिन युद्ध योद्धा की जीत होगी। यह निराशा की इच्छा नहीं है लेकिन जीत का हलचल चिल्लाओ।"
Author: Amit Rajpoot
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