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ये बात बहुत कम लोगों को पता होगी कि यूज़्ड सेनेटरी नैपकिन (उसके संक्रमण और मैटेरियल दोनों) से पर्यावरण को नुकसान होता है। इसलिए इससे निजात पाने के लिए दिल्ली IIT में बीटेक के चौथे वर्ष के छात्र अर्चित अग्रवाल और हैरी सहरावत ने केले के फ़ाइबर से एक ऐसे सेनेटरी पैड को तैयार किया है जो दो साल तक लगातार 122 बार धोकर यूज़ किया जा सकता है। बार-बार प्रयोग के बाद भी इसमें इंफ़ेक्शन का ख़तरा नहीं है और एक सेनेटरी पैड सिर्फ़ 100 रुपये का ही मिलेगा। यह एक बड़ी उपलब्धि है कि सेनेटरी पैड से अब पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा और महिलाओं को इसके ख़र्च से एक बड़ी राहत मिलेगी।
आपको बता दें कि यह सेनेटरी पैड ऑनलाइन बाज़ार में उपलब्ध होगा। इस सेनेटरी पैड के एक पैकेट में दो सेनेटरी नैपकिन रखी गयी हैं, जिनकी क़ीमत 199 रुपये है। महिलाएँ इस पैड को ठंडे पानी से धोकर दो साल तक प्रयोग कर सकती हैं।
ग़ौरतलब है कि यह सेनेटरी पैड कुल चार परतों से बना है जिसे बनाने में पॉलिएस्टर पिलिंग, केले का फ़ाइबर और कॉटन पॉलियूरेथेन लेमिनेट का प्रयोग किया गया है। दिलचस्प है कि केले के जिस डंठल को लोग यूँ ही फेंक देते हैं उसी को प्रयोग में उसके भीतर से फ़ाइबर निकालकर मशीन में सुखाया गया और फिर इसको प्रयोग में लेकर ये अनोखा सेनेटरी पैड तैयार किया गया है।
आविष्कारक बताते हैं कि महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता में यह तकनीक बेहद असरदार साबित होगी। इस तकनीक को तैयार करने में क़रीब डेढ़ लाख रुपये खर्च आता है। मालूम हो कि इस नये आविष्कार का पेटेंट करा लिया गया है।
Author: Amit Rajpoot
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