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आपने अपने बचपन में एक कहावत सुनी होगी कि हाथी अपने रास्ते चला जाता है और कुत्ते भौंकते रहते हैं। वास्तव में ज़्यादातर लोग जो सफ़लता की मुकाम को तय करता है वह उसी हाथी की तरह होते हैं। जी हाँ, एनी दिव्या उसी के एक बड़ा उदाहरण हैं। आपको बता दें कि एनी दिव्या पंजाब के पठानकोट में पैदा हुयी हैं और 10 बरस तक इन्होंने पठानकोट की मिट्टी में ही धमाचौकड़ी की। लेकिन चूँकि इनके पिता एक सिपाही थे, लिहाजा एनी दिव्या जब केवल 10 बरस की थीं, तो इनके पापा की पोस्टिंग आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में हो गयी।
एनी दिव्या अपने परिवार के साथ विजयवाड़ा आ गयीं तो इनकी पढ़ाई विजयवाड़ा के केन्द्रीय स्कूल में होने लगी। स्कूल के दिनों से ही एनी दिव्या ने पायलट बनने का सपना अपने मन में संजोया और अपनी इस इच्छा को जब वह अपने दोस्तों के साथ साझा करतीं तो उनकी दोस्त एनी दिव्या का मज़ाक उड़ाया करती थीं। लेकिन एनी दिव्या ने अपने सपने को ख़ुद से जकड़े रखा और इसके साथ आगे बढ़ती गयीं।
आपको बता दें कि अपने पायलट बनने के इस सपने का पीछा करते-करते एनी दिव्या की राह में कई तरह के रोड़े आये। इनमें सबसे बड़ा अवरोध तब आया जब वह उत्तर प्रदेश के फ़्लाइंग स्कूल, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी में प्रवेश लेने का मन बनाया तो उनके पास पैसों की कमी थी। लेकिन एनी दिव्या के पिता ने उनका पूरा साथ दिया और कुछ लोन लेकर व अपने दोस्तों से मदद लेकर उन्होंने दिव्या की 15 लाख रुपये की फ़ीस अदा की।
अब दिव्या ने अकादमी में प्रवेश तो ले लिया लेकिन समस्याओं ने इनका यहाँ भी पीछा न छोड़ा था। जी हाँ, एनी दिव्या को अंग्रेज़ी नहीं आती थी। इनकी ख़राब अंग्रेज़ी का ख़ूब मज़ाक उड़ाया जाता है। इसलिए ऐसे कई मौक़े आये जब एनी दिव्या ने अकादमी को बीच में ही छोड़ने का मन बना लिया। लेकिन इनके पिता ने दिव्या को ख़ूब ढांढ़स बंधाया।
इन तमाम समस्याओं को पार करते हुए दिव्या ने महज 19 साल की उम्र में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली। 21 साल की उम्र में इन्हें ट्रेनिंग के लिए लंदन भेज दिया गया था। यही वह समय था जब एनी दिव्या को पहली बार बोइंग 777 विमान उड़ाने का मौक़ा मिला। इसी के साथ एनी दिव्या बोइंग 777 उड़ाने वाली दुनिया की सबसे युवा महिला कमाण्डर बन गयीं, जो किसी बड़ी मिसाल से कम नहीं है।
Author: Amit Rajpoot
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