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श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के उत्सव का दिन होता है। इस दिन भगवान ने अपने मामा कंस की जेल में क़ैद अपने माँ-बाप बासुदेव और देवकी के गर्भ से आधी रात को कारागार में ही जन्म लिया था, जिसके बाद कारागार में मौजूद सारे पहरेदार बेहोश हो गये थे और जेल की तमाम बेड़ियाँ अपने आप ख़ुल गयी थीं। वास्तव में इस कहानी को आप दर्शन में भी देख सकते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होते ही मौजूद मोह और माया की बेड़ियाँ ख़ुलना लाजमी है।
बहरहाल, आपको बता दें कि श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्र माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं और इस साल जन्माष्टमी 23 व 24 अगस्त को मनायी जायेगी। इस मौक़े पर आपको यह बता दें कि श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी की रात्रि को मोहरात्रि भी कहा जाता है।
श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी की रात्रि को मोहरात्रि कहे जाने के पीछे यह कारण है कि इस रात में योगेश्वर श्रीकृष्ण का ध्यान, नाम अथवा मंत्र जपते हुए जगने से संसार की मोह-माया से आसक्ति हटती है। चूँकि जन्माष्टमी का व्रत व्रतराज कहलाता है। इसलिए इसके विधि सहित पालन से साधक को अनेक व्रतों से प्राप्त होने वाली महान पुण्य राशि एक बार में प्राप्त हो जाती है।
Author: Amit Rajpoot
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