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सूरज की खतरनाक किरणों से बचने के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना कोई नहीं बात नहीं है। ऑफिस हो या फिर कॉलेज... घर से बाहर निकलने से पहले अमूमन सभी लोग अपनी स्किन पर सनस्क्रीन को अच्छी तरह से लगा लेते हैं ताकि उनकी स्किन खतरनाक UV किरणों से बच जाये और उन्हें टैनिंग की समस्या भी न हो। हालांकि, सनस्क्रीन भी दो प्रकार की होती है... ये शायद ही कोई जानता हो। आज हम आपको सनस्क्रीन के 2 ऑप्शन्स के बारे में बताने जा रहे हैं।
एक है फिजिकल सनस्क्रीन और दूसरा है ओरल सनस्क्रीन।
फिजिकल सनस्क्रीन... वही सनस्क्रीन होती है जिसे आप लोशन या फिर क्रीम फॉर्मेट में अपनी त्वचा पर लगाते हैं। इससे न तो आपको टैनिंग का डर रहता है और न ही स्किन कैंसर का। हालांकि, इसके साथ एक समस्या होती है कि आपको हर 3 से 4 घंटे के अंतराल में इसके त्वचा पर लगाना पड़ता है... क्योंकि इसका असर कुछ ही देर तक रहता है। इसके अलावा फिजिकल सनस्क्रीन शरीर के केवल उस हिस्से को ही धूप से बचाती है जिसपर आप सनस्क्रीन का उपयोग करते हैं।
हालांकि, ओरल सनस्क्रीन की कहानी इससे थोड़ी अलग है।
ओरल सनस्क्रीन में आपको कोई क्रीम या फिर लोशन नहीं लगाना पड़ता बल्कि इसकी कुछ गोलियां आती है, जो आपको खानी पड़ती हैं। ये गोलियां आपको सूरज की किरणों से बचाती हैं। इन गोलियों का ये फायदा होता है कि ये पूरी बॉडी की स्किन को सूरज की खतरनाक किरणों से बचाती हैं। वहीं, इसके अलावा इन गोलियों का सेवन करने के बाद आपको थोड़ी-थोड़ी देर बाद सनस्क्रीन लगाने का भी झंझट नही रहता। इस तरह की गोलियां छुट्टियां मनाने के लिए बेस्ट होती हैं, आप बाहर घूमने जाओ तो सनस्क्रीन लगानी की कोई परेशानी ही नहीं होती।
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