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हाल में अमेरिका ने चीन से आयातित करीब 3 खरब डॉलर वाली वस्तुओं के प्रति 10 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने का औपचारिक एलान किया। चीन ने विवश होकर 23 अगस्त को विरोधी कदम उठाया। अमेरिका ने 24 अगस्त को चीन से अमेरिका तक करीब 5 खरब 50 अरब डॉलर की वस्तुओं के प्रति टैरिफ बढ़ाने की घोषणा की। चीन ने इसका कड़ा विरोध किया। विदेशी विशेषज्ञों का विचार और अंतरराष्ट्रीय लोकमत है कि चीन ने विरोधी कदम उठाया, यह अमेरिकी व्यापारिक दादागिरी के खिलाफ अपरिहार्य प्रतिक्रिया है। अमेरिका को रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए और वार्ता से मतभेद के समाधान वाले रास्ते पर वापस लौटना चाहिए।
ब्रिटेन में लंदन अर्थतंत्र और वाणिज्य नीतिगत कार्यालय के पूर्व प्रधान जॉन रोस ने चीनी समाचार एजेंसी शिनहुआ को दिए एक ई-मेल इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका ने बेवजह चीनी वस्तुओं के प्रति टैरिफ बढ़ाया, चीन का विरोधी कदम उठाना इसका अपरिहार्य जवाब है।
अमेरिकी कोलंबिया विश्वविद्यालय के अनवरत विकास केंद्र के प्रधान जेफरी साक्स ने कहा कि चीन ने अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने वाले निर्णय के प्रति उचित प्रतिक्रिया की। अमेरिका ने गलत रूप से माना कि चीन की आर्थिक सफलता अमेरिका द्वारा दी गई कीमत पर आधारित है।
अमेरिका में चीन-अमेरिका अनुसंधान केंद्र के जाने-माने विद्वान सौरभ गुप्ता के विचार में चीन का विरोधी कदम उठाना अप्रत्याशित नहीं है। चीन के कदम से बाहरी दुनिया को महत्वपूर्ण सूचना दी गई, यानी कि व्यापारिक वार्ता को संप्रभुता की समानता के आधार पर होना चाहिए। चीन एकतरफा तौर पर अपने लिए निष्पक्ष स्पर्धा वातावरण की प्राप्ति के लिए टैरिफ कदम को नहीं छोड़ेगा।
आईएएनएस
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