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हमारे देश में हर महिला को देवी का दर्जा दिया गया है। वह एक समय में बहुत से काम कर सकती हैं। औरत अगर बच्चा पैदा कर सकती है, तो वह योद्धा की तरह जंग के मैदान में भी उतर सकती है। उन्हें जब भी ऐसा लगता है कि उन्हें पीछे धकेला जा रहा है तो वह अपने हक के लिए हमेशा आगे आई हैं। महिलाओं को उनके अधिकार और समाज में समान दर्जा दिलाने के उद्देश्य से आज के दिन यानी 26 अगस्त को Women's Equality Day मनाया जाता है। महिलाओं ने हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है। लेकिन इसके बावजूद आज भी बहुत सी ऐसी चीजे हैं जहां महिलाओं को ही समझौता करना पड़ता है।
मिस या मिसेज:- जब किसी लड़की की शादी होती है तो उसकी जिंदगी में बहुत सारे बदलाव आते हैं। उसे अपनी कुछ आदतों में बदलाव करने से लेकर अपने ससुराल वालों की हर खुशी का भी ध्यान रखना पड़ता है। लेकिन इससे भी ज्यादा दिलचस्प बात तो यह है कि उसे अपना नाम तक बदलना पड़ता है। शादी होते ही लड़की का सरनेम उसके पिता से बदलकर अब पति का हो जाता है। इसी के साथ लड़के तो हमेशा MR. ही रहते हैं लेकिन शादी के बाद लड़कियां जरूर Miss से Mrs. हो जाती हैं।
समान वेतन:- महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर वेतन मिलने का मुद्दा लंबे वक्त से सुर्खियों में हैं। कुछ समय पहले कई बॉलीवुड अदाकारओं ने भी इस पर सवाल उठाया था कि, आखिर क्यों उन्हें समान काम करने के बावजूद एक्टर के बराबर वेतन नहीं मिलता? यह मुद्दा केवल फिल्मी सितारों का ही नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं का हैं। अगर कोई महिला पुरुषों की बराबरी ही काम करती है तो उसे उनसे कम पैसा क्यों दिया जाता है।
प्रोपर्टी पर सिर्फ लड़कों का हक:- माता-पिता के लिए उनके सभी बराबर होते हैं फिर चाहे वह लड़का हो या लड़की। लेकिन पिता के देहांत के बाद उनकी जायदाद पर केवल बेटे का ही हक होता है। हालांकि, पिता की प्रोपर्टी में बेटियों की हिस्सेदारी के लिए भी कानून बनाए गए हैं, लेकिन आज भी हमारे समाज में कई ऐसे परिवार हैं जो इन पर अमल नहीं करते।
देर रात घर से बाहर रहने पर पाबंदी:- अक्सर घरों में देखा गया है कि अगर बेटा देर रात घर से बाहर रहकर दोस्तों के साथ पार्टी कर रहा है या कहीं घूम रहा है तो उसे इसके लिए पूरा इजाजत मिलती है। लेकिन अगर किसी बेटी को घर आने में थोड़ी देर हो जाती है तो उससे कई सवाल कर लिए जाते हैं या उसे डांट दिया जाता है। अगर आप खराब की बात रहे हैं तो वह फिर लड़के और लड़की दोनों के लिए हैं।
रीति-रिवाज:- हमारे देश में बहुत से ऐसे रीति-रिवाज हैं, जिनमें पुरुषों को ही ऊंचा दर्जा दिया गया है। कहते हैं कि कोई भी महिला अकेले किसी पूजा में शामिल नहीं हो सकती है यहां उनके साथ उनके पति का होना बहुत जरूरी है। सीधे शब्दों के कहा जाए तो पुरुषों को समाज एक विशेष स्थान दिया गया है।
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