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भाद्रपद की आज अमावस्या तिथि है। वैसे तो प्रत्येकत मास की अमावस्या तिथि धार्मिक लिहाज से बेहद ख़ास होती है, लेकिन भादों महीने में आने वाली अमावस्या की बात ज़रा अलग है। आपको बता दें कि अमावस्या हिन्दू पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है, जिसकी रात को चन्द्रमा बिल्कुल नहीं दिखाई ता है। इस दिन का भारतीय जनजीवन में अत्यधिक महत्व हैं। भाद्रपद में पड़ने वाली अमावस्या को हम भदई अमावस, कुशग्रहणी अमावस्या, कुशोत्पाटिनी अमावस्या और पिथौरी अमावस के नाम से भी जानते हैं।
जी हाँ, आपको बता दें कि भाद्रपद अमावस्या के दिन कुश एकत्रित करने के कारण ही इसे कुशग्रहणी अमावस्या कहा जाता है। इसका कुशोत्पाटिनी अमावस्या नाम पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। मान्यता है कि धार्मिक कार्यों, श्राद्ध कर्म आदि में इस्तेमाल की जाने वाली घास या दूब यदि इस दिन एकत्रित की जाये तो वह वर्षभर तक पुण्य फलदायी होती है। यदि भाद्रपद अमावस्या सोमवार के दिन हो तो इस कुश का प्रयोग 12 सालों तक किया जा सकता है। ये बात भी ग़ौर करने लायक है कि शास्त्रों में दस प्रकार की कुशों का उल्लेख मिलता है-

कुशा:काशा यवा दूर्वा उशीराच्छ सकुन्दका:।
गोधूमा ब्राह्मयो मौन्जा दश दर्भा: सबल्वजा:।।
ग़ौरतलब है कि भदई अमावस्या के दिन गंगा स्नान, पूजा पाठ, तर्पण और श्राद्ध आदि करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। गंगा स्नान संभव न हो तो पास की नदी में स्नान करें। लेकिन स्नान के लिए यदि घर से बाहर जाना संभव न हो तो बाल्टी में ही गंगाजल की कुछ बूंदे डालकर स्नान करें। इस दिन अन्न दान का भी महत्व है जैसा कि बाकी अमावस्या के दिन किया जाता है। मान्यता है कि इस अमावस्या को व्रत करने से बुद्धिमान और बलशाली संतान की प्राप्ति होती है।
Author: Amit Rajpoot
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