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बिहार के दशरथ माँझी और मध्यप्रदेश के सीताराम लोधी में कोई अंतर नहीं है। क्रमशः एक ‘माउंटेनमैन’ हैं तो दूसरे हैं ‘वॉटरमैन’। जी हाँ, आपको बता दें कि दशरथ माँझी ने अपने गाँव वालों की पानी की दिक्कतों को समाप्त करने के लिए जहाँ एक भारी भरकम पहाड़ को चीरकर रास्ता तैयार कर दिया था तो वहीं मध्यप्रदेश के 70 वर्षीय बुज़ुर्ग किसान सीताराम लोधी ने 18 महीनों में अकेले ही कुआँ खोद दिया, जिससे कि पिछले चार सालों से लगातार सूखा झेल रहे उनके गाँव की प्यास से जानें बच सकीं। 70 वर्षीय सीताराम लोधी बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित छतरपुर ज़िले के हदुआ गाँव के रहने वाले हैं।
आपको बता दें कि सीताराम लोधी के गाँव में एक मात्र हैंडपंप था, जो कि गर्मियों में पूरी तरह से सूख जाता था। गाँव के लोग इससे ख़ासे परेशान रहते थे। ऐसे में गाँव वालों की परेशानी को अपना बनाकर सीताराम लोधी ने अकेले ही कुआँ खोदने की ठान ली, जबकि उन्होंने इसके लिए कुछ जनों का साथ माँगा था, लेकिन किसी ने उनका साथ नहीं दिया। हालाँकि, सीताराम लोधी के इस फैसले से उनके परिवार के लोग काफ़ी नाराज थे। बावजूद इसके उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा को क़ायम रख कुआँ खोदने का काम लगातार जारी रखा।
अंत में जैसे ही कुएँ में पानी दिखा तो हदुआ गाँव के लोगों की ख़ुशी का कोई ठिकाना न था। बहरहाल, जब तक इस दुनिया में सीताराम लोधी जैसे सच्चे बाहुबली, इरादों के पक्के लोग हैं, तब तक लोगों के प्राणों की रक्षा होती रहे। यक़ीनन सीताराम लोधी का ये कारनामा दुनिया में परोपकार और दृढ़ इच्छाशक्ति की एक मज़बूत मिसाल है।
Author: Amit Rajpoot
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