Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
आध्यात्मिक व्यक्तियों के लिए कर्म एक बोझिल बंदन हैं। जी हाँ, अच्छा कर्म हो या बुरा, आध्यात्मिक व्यक्ति के लिए सभी बुरे हैं। आपको बता दें कि जो व्यक्ति अस्तित्व के साथ एक होना चाहता है, उसके लिए कुछ भी अच्छा या बुरा नहीं होता है। वैसे तो कर्मों को गुणों के आधार पर बाँटा गया है। लेकिन एक बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि आपके कर्म चाहे अच्छे हों या फिर बुरे, दोनों ही बंधन हैं।
वास्तव में अच्छे या बुरे कर्म उसी के लिए होते हैं जो कि द्वैत में जीते हैं। आध्यात्मिक व्यक्ति तो कर्मों के बंधन से मुक्त अद्वैत के आनन्द में खोया रहता है। जो व्यक्ति आध्यात्मिक होता है, उसके लिए कर्म अच्छे हों या बुरे, सभी कर्म बुरे ही होते हैं। सच यही है कि एक साधक को सारे बोझ गिरा देने का भाव लिये हुए ही होना चाहिए। उसके लिए कूड़ा और सोना दोनों ही भारी होते हैं, जबकि दूसरे सभी मूर्ख यह सोचते हैं कि सोना ढोना महान कार्य है।
आपको बता दें कि समझदार व्यक्ति यह देखता है कि वह चाहे सोना ढोये या फिर कूड़ा, उसके लिए दोनों ही बोझ हैं, जबकि दूसरा इंसान यह सोचता है कि सोना कूड़े से बेहतर होता है, क्योंकि उस समय वह शायद कूड़ा ढो रहा है।
Author: Amit Rajpoot
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop App वो भी फ़्री में और कमाएँ ढेरों कैश आसानी से!
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.