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निर्गुण-निराकार ओंकार का सगुण साकार स्वरूप भगवान गणेश के एकदंत-गजमुख रूप में प्रणव या ओम की आकृति साफ़ दिखाई देती हैं। ऐसे ओम् मूर्तिमान स्वरूप प्रथम-पूज्य ईश्वर की वन्दनीय हैं। जी हाँ, भगवान गणेश प्रथम पूज्य हैं। अर्थात् कोई भी कर्मकांड हो या विधान हो भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले की जाती है। इस बारे में तो दुनियाभर के विद्वान एकमत ही हैं कि नाद से ही सृष्टि की उत्पत्ति हुयी है और यह नाद है ओंकार का नाद।
आपको बता दें कि भगवान गणेश निर्गुण-निराकार ओंकार का सगुण साकार स्वरूप हैं। उनके एकदंत-गजमुख रूप में प्रणव या ओम् की आकृति साफ़ दिखाई देती है। कहते हैं कि भगवान गणेश इसलिए गजमुख हुए, क्योंकि उन्हें अपना विग्रह में प्रणव या ओंकार रूप दिखाना था। मंत्रों के शुरू में जैसे पहले प्रणव या ओम का उच्चारण किया जाता है, वैसे ही ओम मूर्तिमान रूप गणेश की सभी देवताओं में पहले पूजा होती है।
Author: Amit Rajpoot
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