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प्रकृतिक चिकित्सा में आहार से थेरैपी के बारे में विस्तार से वर्ण दिया गया है। लेकिन ज़्यातार लोग खाने को पेट भरने के लिए ही खाते हैं। जी हाँ, आपको बता दे कि सामान्य लोग तीन वक़्त का खाना खाकरसोचते हैं कि शरीर की ऊर्जा का तज़ाम हो गया है। लेकिन खाना केवल खाना नहीं है। आपको बता दें कि प्रकृति चिकित्सा में खाना को दवा माना जाता है, यह एक थेरैपी है। अच्छी सेहत के लिए इसे प्राकृतिक और संतुलित तौर पर लिया जाना ज़रूरी है। इस तरह से आहार के मोटे तौर पर तीन प्रकार हैं-
1. निष्कासन आहारः
निष्कासन आहार की श्रेणी में नींबू, नारियल का पानी, सब्ज़ियों का सूप, छाछ और गेहूँ की घास का रस आदि शामिल है।
2. सुखदायक आहारः
सुखदायक आहार की श्रेणी में जैसे ताज़े मौसमी फल, सलाद, उबली हुयी सब्ज़ियाँ, अंकुरित दालें और हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ आदि शामिल हैं।
3. रचनात्मक आहारः
रचनात्मक आहार की श्रेणी में पौष्टिक आटा, अप्रसंस्कृत चावल, दालें और दही आदि शामिल हैं। घारीय होने की वजह से ये आहार स्वास्थ्य में सुधार करने, शरीर की सफ़ाई और बीमारी के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित करने में मदद करते हैं। इस लिहाज से भोजन का उचित संयोजन आवश्यक है। सेहतमंद होने के लिए भोजन 20 फीसदी अम्लीय और 80 फीसदी क्षारीय होना चाहिए।
Author: Amit Rajpoot
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